The district chief and 15 heads belonged to the BJP, only one of the Congress, this time the committees were 21, the challenge before the Congress MLAs doubled. | जिला प्रमुख व 15 प्रधान भाजपा के थे, कांग्रेस का सिर्फ एक, इस बार समितियां 21, कांग्रेसी विधायकों के सामने चुनौती दोगुनी


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जोधपुर2 घंटे पहले

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मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा व विधायकों की परफॉर्मेंस दोनों दांव पर।(फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा व विधायकों की परफॉर्मेंस दोनों दांव पर।(फाइल फोटो)

  • पंचायतीराज चुनावों में भाजपा से ज्यादा कांग्रेस के सामने चुनौती

पहले परिसीमन और फिर कोरोना के चलते स्थगित होते आए रहे पंचायतीराज चुनाव इस बार कांग्रेस के लिए कड़ी परीक्षा है। खासकर जोधपुर जिले में। यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ विधायकों की भी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा भी पूरा जोर लगा रही है। संगठन के कई नेताओं को फील्ड में उतार दिया है। जिला परिषद के जिला प्रमुख व पंचायत समिति प्रधानों के चुनावों के लिए सदस्यों की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है।

इसी के साथ कांग्रेस- भाजपा के बड़े नेताओं ने भाग दौड़ शुरू दी है। पिछले कार्यकाल में जिला प्रमुख सहित 16 प्रधान में से 15 प्रधान भाजपा के थे। पंचायत समिति बावड़ी से एकमात्र कांग्रेस का प्रधान बना था। इस बार पंचायत पुनर्गठन के बाद पंचायत समितियों की संख्या 16 से 21 हो गई है। जिसमें 10 समितियों में प्रधान का पद महिलाओं के लिए आरक्षित है।

अब कांग्रेस की सरकार है तो विधायक मतदाताओं से कह रहे हैं कि कड़ी से कड़ी जोड़ें। कांग्रेस के पास बावड़ी पंचायत समिति थी लेकिन इसके बाद विधानसभा चुनावों में फलोदी व भोपालगढ़ को छोड़ सभी विधायक कांग्रेस के बन गए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री, उनके बेटे वैभव गहलोत व विधायकों की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

इधर केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत वापस भाजपा का जिला प्रमुख व पंस में प्रधान बनाने के लिए जोर लगा रहे हैं। इधर, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी भी इस बार पंचायतीराज चुनाव लड़ने जा रही है। इससे दोनों दलों का समीकरण बिगड़ सकता है।

जिलाध्यक्षों के दावे…सब प्रधान हमारे बनेंगे

कांग्रेस देहात जिला अध्यक्ष व बिलाड़ा विधायक हीराराम मेघवाल ने बताया कि जिला प्रमुख व 21 पंचायत समितियों में प्रधान कांग्रेस के बनेंगे। इसके लिए हर सीट पर प्रभारी लगाए गए हैं। वहीं, भाजपा के देहात जिला अध्यक्ष जगराम विश्नोई ने बताया कि इस बार भी जिला प्रमुख व समितियों में प्रधान भाजपा के ही बनेंगे।

क्या कांग्रेस जोड़ पाएगी कड़ी से कड़ी…. पिछले बोर्ड में भाजपा की सरकार थी, भाजपा ने जिले की 16 में से 15 पंचायत समितियों पर जमाया था कब्जा, जिला प्रमुख भी भाजपा का था, अब कांग्रेस के सामने यही चुनौती

…और भाजपा में सांसद व केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत की प्रतिष्ठा जुड़ी, साथ ही अपनी 15 पंचायत समितियां व जिला प्रमुख का पद बचाने की चुनौती

विधायक, मंत्री, पूर्व विधायक सब अपनी प्रतिष्ठा बचाने में जुटे…

1. ओसियां – ओसियां में तिंवरी,ओसियां, बावड़ी तीन पंचायत समितियां है। पिछले कार्यकाल में तिंवरी-ओसियां में भाजपा के प्रधान थे। बावड़ी से जिले का अकेला कांग्रेसी प्रधान बना था। अब विधायक दिव्या मदेरणा के लिए तीनों जगह प्रधान बनाने की चुनौती है। वहीं जिला प्रमुख के लिए सात जिला परिषद सदस्य ओसियां विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आएंगे। उनकी मां लीला मदेरणा जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ेगी। वहीं भाजपा में पूर्व कैबिनेट मंत्री शंभूसिंह खेतासर, पूर्व संसदीय सचिव भैराराम सियोल की प्रतिष्ठा दांव पर है।

2. लोहावट – लोहावट विधानसभा क्षेत्र में देचू, लोहावट, बापिणी व आऊ पंचायत समितियां आती है। आऊ नई पंचायत समिति बनाई है। पिछली बार तीनों जगह भाजपा ने प्रधान बनाए थे। ऐसे में आऊ सहित चारों पंस में कांग्रेस के प्रधान बनाने को लेकर विधायक किशनाराम विश्नोई की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां लोहावट के पूर्व विधायक भाजपा के गजेंद्रसिंह खींवसर चारों पंचायत समितियों में भाजपा के प्रधान बनाकर विधानसभा चुनावों में हुई अपनी हार का बदला लेने पूरा जोर लगा रहे हैं।

3. शेरगड़ – पिछले कार्यकाल में शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बालेसर, शेरगढ़, सेखाला तीन पंचायत समितियां थी। तीनों में भाजपा के प्रधान बने थे। इस बार चामू पंचायत समिति नई बनी है। ऐसे में इन चारों पंस में कांग्रेस के प्रधान बनाने को लेकर विधायक मीना कंवर व उनके पति पीसीसी सदस्य उम्मेदसिंह राठौड़ की प्रतिष्ठा दांव पर है। वहीं भाजपा के बाबूसिंह राठौड़ कार्यकर्ताओं का आपसी मनमुटाव दूर करने में जुटे हैं। उन्होंने बालेसर में मीटिंग लेकर चारों ही समितियों में भाजपा के प्रधान बनने का दावा किया है।

4. लूणी – पिछली बार विधानसभा लूणी में लूणी व मंडोर दो पंचायत समितियां थी। दोनों ही जगह से भाजपा के प्रधान थे। इस बार कैरु व धवा दो नई समितियां बनी है। ऐसे में इन चारों पंस में कांग्रेस के प्रधान बनाना विधायक महेंद्र विश्नोई के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। पिछली बार भाजपा की मंडोर प्रधान अनुश्री पूनिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में उन्हें प्रधान पद छोड़ना पड़ा था। भाजपा के पूर्व विधायक जोगाराम पटेल की प्रतिष्ठा भी दांव पर रहेगी।

5. बिलाड़ा – विधानसभा बिलाड़ा क्षेत्र में बिलाड़ा, पीपाड़ पंचायत समितियां है। पिछले कार्यकाल भाजपा के प्रधान थे। इस बार कांग्रेस के विधायक हीराराम मेघवाल की प्रतिष्ठा दांव पर हैं। मेघवाल विधायक होने के साथ कांग्रेस देहात के जिला अध्यक्ष भी हैं। टिकट वितरण से लेकर पूरे जिले का मैनेजमेंट करना उनके जिम्मे है। सीएम की प्रतिष्ठा भी इन्हीं के हाथों में है। दूसरी ओर भाजपा में रामनारायण डूडी व पूर्व विधायक अर्जुनलाल गर्ग जोर लगा रहे हैं दोनों समितियां भाजपा के पास रहे।

6. फलोदी – पिछले कार्यकाल में फलोदी- बाप दोनों पंस से भाजपा के प्रधान बने थे। इस बार घंटियाली नई पंस बनाई गई है। इन तीनों पंस में भाजपा के प्रधान बनाने को लेकर विधायक पब्बाराम बिश्नोई की प्रतिष्ठा दांव पर हैं। वहीं, कांग्रेस से विधानसभा चुनाव हारे महेश व्यास अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा पाने के प्रयास करेंगे लेकिन स्थानीय नेताओं की गुटबाजी व नई पंचायत समिति बनाने के दौरान की नाराजगी को पाटना होगा।

7. भोपालगढ़ – पिछले कार्यकाल में भोपालगढ़ में भाजपा का प्रधान था। भोपालगढ़ विधानसभा का कुछ हिस्सा बावड़ी पंस व कुछ हिस्सा मंडोर पंस में है। विधायक पुखराज गर्ग आरएलपी से हैं। पार्टी इस बार पूरे जिले में चुनाव लड़ रही है। ऐसे में गर्ग पर भोपालगढ़ में अपनी पार्टी का प्रधान बनाने का भारी दबाव है। उन्हें यहां भाजपा के दिग्गज नेता रामनारायण डूडी एवं कांग्रेस में पाली के पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ की टीम से मुकाबला करना होगा।

दोनों दलों ने बड़े नेताओं को डेमेज कंट्रोल में लगाया

जोधपुर जिले के कांग्रेस प्रभारी महेंद्र चौधरी,सहायक प्रभारी रामलाल जाट व प्रशांत बैरवा के साथ वैभव गहलोत खुद विधायकों व स्थानीय नेताओं से संपर्क कर जिला परिषद व पस में बोर्ड बनाने को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ भाजपा में टिकट वितरण को लेकर पूर्व विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा में मोर्चा संभाल रखा है। राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, सांसद पीपी चौधरी, पूर्व सांसद जसवंतसिंहबिश्नोई, शंभूसिंह खेतासर, रामनारायण डूडी सहित बड़े नेता टिकट वितरण को लेकर समीकरणों को बिठा रहे हैं।

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