Red gold of Jaisalmer in Central Vista / Red granite of Lakha village will enhance the beauty, increased demand for red granite, happy faces of mine owners facing corona period | देश का सबसे महंगा लाल ग्रेनाइट, सिंदूरी और खून जैसे लाल रंग सबसे बड़ी खूबी, 10 लाख वर्ग फीट स्टोन से बनेंगे फर्श और फुटपाथ


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जैसलमेरएक घंटा पहलेलेखक: सिकन्दर शेख

दिल्ली में बन रहे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की खूबसूरती जैसलमेर का लखा ग्रेनाइट बढ़ाएगा। इस प्रोजेक्ट में करीब 10 लाख स्क्वायर फीट लाल यानि लखा ग्रेनाइट लगाया जाएगा। पिछले दो महीने से इसकी सप्लाई शुरू हो चुकी है और अब तक 60 हजार क्यूबिक मीटर ग्रेनाइट दिल्ली सप्लाई भी हो चुका है। जैसलमेर और बाड़मेर जिलों की सीमा पर पाए जाने वाले इस लाल ग्रेनाइट का उपयोग सेंट्रल विस्टा में फर्श, पैदल मार्ग और कॉलम के निर्माण में किया जाएगा।

सेंट्रल विस्टा में लखा ग्रेनाइट लगाया जा रहा है।

सेंट्रल विस्टा में लखा ग्रेनाइट लगाया जा रहा है।

जैसलमेर से 120 किलोमीटर दूर लखा गांव से देश का एकमात्र लाल ग्रेनाइट निकलता है। ऐसा दावा किया जाता है कि यह देश का सबसे महंगा ग्रेनाइट है, जिसकी कीमत करीब 450 रुपए स्क्वायर फीट है। हर महीने डेढ़ लाख स्क्वायर फीट स्टोन वहां सप्लाई होगा। 4 महीने में 10 लाख स्क्वायर फीट ग्रेनाइट प्रोजेक्ट के लिए पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। इसके लिए पिछले दो महीने से सोर्सिंग भी चल रही है।

नेशनल वार मेमोरियल में लगा लखा ग्रेनाइट।

नेशनल वार मेमोरियल में लगा लखा ग्रेनाइट।

नेशनल वार मेमोरियल दिल्ली में भी लगा लखा ग्रेनाइट
2019 में इंडिया गेट के पास 40 एकड़ में बने नेशनल वार मेमोरियल में सबसे ज्यादा लखा ग्रेनाइट का उपयोग किया गया। युद्ध स्मारक को देश को समर्पित करते वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद थी। उस वक्त इस लाल पत्थर की खूबसूरती ने उन्हें प्रभावित किया था। लखा में ग्रेनाइट की माइंस चला रहे शोकत अली बताते हैं कि दिल्ली में बने युद्ध स्मारक में इसी लाल ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है।

इस तरह का होता है लखा ग्रेनाइट। जिसे लाल सोना भी कहते हैं।

इस तरह का होता है लखा ग्रेनाइट। जिसे लाल सोना भी कहते हैं।

यह है इसकी खूबी, सिंदूरी और खून जैसा लाल रंग इसकी पहचान
ये लाल ग्रेनाइट अपनी अनूठी लाल छाया के लिए प्रतिष्ठित है। इसकी एक चिकनी बनावट है और लाल रंग पर बहुरंगी माइक्रोपार्टिकल्स की तरंगें इस पत्थर को बहुत ही आकर्षक बनाती हैं। इसकी खूबसूरती इसके रंग में हैं। सिंदूरी और खून जैसा लाल रंग इसकी सबसे बड़ी पहचान है और इसी रंग की वजह से यह प्रसिद्ध है।

लखा गांव के नाम से हुआ लखा ग्रेनाइट
इसे लखा ग्रेनाइट इसलिए भी कहते हैं क्योंकि यह जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर फतेहगढ़ तहसील के लखा गांव में निकलता है। ऐसा दावा किया जाता है कि ऐसे रंग का अनूठा ग्रेनाइट दुनिया में और कहीं नहीं मिलता है।

लखा गांव की यह खदान, जहां से देश का सबसे महंगा ग्रेनाइट निकलता है।

लखा गांव की यह खदान, जहां से देश का सबसे महंगा ग्रेनाइट निकलता है।

5 साल से मंदी की मार झेल रहे,अब खिले चेहरे
खदान मालिक मुकद्दर मेहर ने बताया कि नोटबंदी व जीएसटी का काफी कुछ असर लखा के खदान मालिकों पर भी पड़ा था और रही सही कसर कोरोना ने निकाल दी थी। इस वजह से 65 में से सिर्फ 20 ही काम कर पा रही है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से इनकी डिमांड बढ़ गई हैै।

इसे कई देशों में भी निर्यात किया जाता है। यहां 1990 में खनन की शुरूआत हुई थी। खदान मालिक कमल सिंह ने बताया कि लाल रंग का ग्रेनाइट दुनिया में कहीं और उपलब्ध नहीं है। भारत के अलावा अरब देश, तुर्किस्तान, चीन और इस्तांबुल समेत अन्य देशों में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड है।

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