ground report from mp’s village | बारिश में नदी चढ़ने पर UP पर आश्रित हो जाते हैं पन्ना के 25 हजार लोग; डिंडौरी में भी नदी पर पुल नहीं; धार में 10 गांवों के लोग लकड़ी के सहारे पार करते हैं नदी


पन्ना/डिंडौरी/ धार40 मिनट पहले

हम आजादी का 74वां जश्न मनाने जा रहे हैं। इन 74 साल में ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बहुत ज्यादा नहीं बदली। हेल्थ, एजुकेशन, बिजली, साफ पानी की सप्लाई में गांव पिछड़े हैं। पक्की सड़कें नहीं हैं। नदी किनारे बसे गांव बरसात में हर साल टापू बन जाते हैं। यूं तो मध्यप्रदेश में ऐसे तमाम गांव हैं, पर हम आपके सामने 3 जिलों पन्ना, धार और डिंडौरी के गांवों की तस्वीर दिखा रहे हैं, जो बरसात में नदी चढ़ने पर 4 महीने के लिए शहरों से कट जाते हैं। मुश्किल तब आती है, जब कोई बीमार पड़ता है। मरीज को खाट पर लेटाकर लंबा रास्ता तय कर अस्पताल तक पहुंचाया जाता है।

पहले जानिए, पन्ना का हाल
जिले के अजयगढ़ जनपद क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे ग्राम खोरा से ग्राम भदैयां के बीच बागै नदी पर पुल नहीं है। बारिश में इलाके के करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांव की 25 हजार से अधिक आबादी का संपर्क पन्ना जिले से टूट जाता है। लोग उत्तर प्रदेश के कालिंजर होते हुए लंबा सफर करते हैं। हर साल बारिश के 4 महीने मुश्किल होते हैं।

दो दशक से मांग
पुल बनाने की मांग दो दशक से भी ज्यादा समय से चल रही है। क्षेत्र के समाजसेवी राम पाठक के साथ लोग जल सत्याग्रह तक कर चुके हैं। लोगों ने अपने बच्चों का एडमिशन UP में कराया है। करतल, नरैनी, अतर्रा और बांदा के स्कूल में पढ़ते हैं। लोग उत्तर प्रदेश के बांदा को बेहतर मानते हैं।

पन्ना में नदी पार करने के साथ गांव में सड़क पर भी कीचड़ फैली रहती है।

पन्ना में नदी पार करने के साथ गांव में सड़क पर भी कीचड़ फैली रहती है।

डिंडौरी का हाल

आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले के गांवों का भी कमोबेश यही हाल है। शहपुरा विकासखंड बस्तरा ग्राम पंचायत के बरगा गांव के ग्रामीण नदी पार कर आते-जाते हैं। बरसात में नदी उफान पर होती है, तो गांव में ही कैद हो जाते हैं। बरगा से चुंदरी व बस्तरा पहुंचने के लिए नदी को पार करना पड़ता है।

ग्रामीणों का दर्द

  • बरगा के रामकुमार ने बताया, वे रोज नदी पार कर जानवरों को चराने उस पार ले जाते हैं। खेत भी नदी के पार है। नदी में बाढ़ आती है, तो चुंदरी गांव में रहना पड़ता है।
  • चुंदरी गांव की मायाबाई और सावित्री का कहना है, मजबूरी में बरगा और कोहानी देवरी जाने के लिए उफनती नदी तक पार करना पड़ता है।
  • बरगा के कुंवर सिंह मार्को ने बताया, कसहा नदी पर पुल बनवाने की मांगा लगातार उठाते आ रहे हैं। नेता वादे कर चले जाते हैं।
डिंडौरी में नदी पार करने के बाद रास्ते में कीचड़ भरा है।

डिंडौरी में नदी पार करने के बाद रास्ते में कीचड़ भरा है।

धार : 10 गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर पार करते हैं नदी
गंधवानी तहसील के वन ग्राम भूरियाकुंड, होली बयडॉ, गुणीयारा, रामगढ़, रतनपुरा, उमरकुआं आदि के 10 गांवों के लोगों को लकड़ी के सहारे और एक-दूसरे का हाथ थामकर नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में यही हाल रहता है। तेज बारिश के समय जब नदी उफान पर होती है, तो गांवों का संपर्क भी तहसील मुख्यालय से टूट जाता है। जरुरत पड़ने पर कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से 20 किमी घूमकर जाना पड़ता है। कोई बीमार हो जाता है, तो उसे बांस या लकड़ी के सहारे झोले में बांधकर ले जाना पड़ता है। यही नहीं, अनाज पिसवाने के लिए भी कंधे पर बोरी रखकर नदी पार करनी पड़ती है। पिछले साल गंधवानी आरईएस विभाग ने यहां पुलिया निर्माण का सर्वे कर किया था। इसके बाद 1.38 करोड़ का स्टीमेट बनाकर प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक उसका कुछ नहीं हुआ।

जनपद सदस्य रेमसिंह गबराल भूरिया का कहना है, पहाड़ और जंगल में बसे लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करते है। जब नदी उफान पर आती है, तो रस्सी डालकर नदी पार करते हैं। कई बार दुर्घटना भी हो जाती है।

धार में नदी भरने पर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर भी रास्ता पार करना पड़ता है।

धार में नदी भरने पर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर भी रास्ता पार करना पड़ता है।

रिपोर्ट-

धार से गोपाल खंडेलवाल

पन्ना से सुह्दय तिवारी

डिंडौरी से भीमशंकर साहू

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