Due to the investigation of Lokayukta, the registration of the registrant was stuck, the accused took 5 lakh loan from the bank by taking advantage of his name. | लोकायुक्त की जांच के चलते रजिस्ट्री कराने वाले का नामांतरण अटका था, आरोपी ने अपने नाम का फायदा उठाकर बैंक से 5 लाख लोन ले लिया


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जबलपुरएक घंटा पहले

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तिलवारा थाने में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज। - Dainik Bhaskar

तिलवारा थाने में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज।

पांच हेक्टेयर कृषि भूमि का फर्जी बही बनाकर पूर्व भू-स्वामी ने बैंक से 5 लाख का लोन ले लिया। दरअसल लोकायुक्त की जांच के चलते रजिस्ट्री के बाद पीड़ित के नाम से जमीन का नामांतरण नहीं हो पाया था। इसी का फायदा उठाते हुए पूर्व भू-स्वामी ने अपने नाम की फर्जी बही तैयार कराई और बैंक में बंधक रखकर लोन ले लिया। पीड़ित की शिकायत पर तिलवारा पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच में लिया है।

तिलवारा पुलिस के मुताबिक गोरखपुर गुरुद्वारा के पीछे रहने वाले गुरूदीप सिंह छावड़ा के पिता कल्याण सिंह छावड़ा ने 30 जून 2011 को बरगी विकास खंड स्थित खसरा न. 22, 23, 24, 26 रकवा 5 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराई थी। इसका पूरा भुगतान जमीन मालिक चंदेरी घाट पिपरिया निवासी मंगीलाल मरावी को कर दिया था। इसकी बही भी उसने बनवा लिया था। पर लोकायुक्त कार्रवाई लंबित होने के चलते संपत्ति का नामांतरण नहीं हो पाया था।

अपने नाम का फायदा उठाकर आरोपी ने किया फर्जीवाड़ा

आराेपी मंगीलाल मरावी ने नामांतरण न होने का फायदा उठाते हुए अपने नाम की फर्जी बही तैयार कराई। 2015 में आरोपी ने बैंक से पांच लाख रुपए लोन भी स्वीकृत करा ली। इसकी जानकारी पीड़ित को 2020-21 में हुई, जब उसने खसरा निकलवाया। खसरा के कैफियत कॉलम में 2 अक्टूबर 2019 को बैंक आफ महाराष्ट्र शाखा नारायणपुर में कृषि प्रयोजन हेतु 5 लाख रुपए में बंधक है, लिखा हुआ मिला। जबकि इस जमीन संबंधी सभी दस्तावेज उसके पास है। नामांतरण न होने का फायदा उठाकर आरोपी ने बैंक से लोन ले लिया। तिलवारा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धाेखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच में लिया है।

रजिस्ट्री की तरह नामांतरण है महत्वपूर्ण प्रक्रिया

जमीन की रजिस्ट्री एक प्रक्रिया है और नामांतरण दूसरा बहुत जरूरी प्रक्रिया होता है। नामांतर, राजस्व रिकॉर्ड में एक व्यक्ति से किसी संपत्ति का ट्रांसफर दूसरे व्यक्ति के नाम कर करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। नामांतरण के बाद ही क़ानूनी तौर पर एक व्यक्ति अपनी जमीन का मालिक बन पाता है। नामांतरण करने से पहले पटवारी व आरआई की रिपोर्ट भी लगती है। इसके बाद तहसीलदार या एसडीएम नामांतरण आदेश जारी करते हैं। फिर राजस्व रिकॉर्ड में इसे चढ़ाया जाता है।

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