Took the link of PK dot print for 600 rupees and started making fake cards, used to sell 20 rupees card for 1 thousand | पीके डॉट प्रिंट की 600 रुपए में लिंक खरीदी और बनाने लगे फर्जी कार्ड, 20 रुपए का कार्ड 1 हजार में बेचते थे


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इंदौर24 मिनट पहले

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इंदौर में अफसरों ने द्वारकापुरी थाने के सामने फोटोकॉपी की आड़ में फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाने वाले दो लोगों को पकड़ा था। जांच में जो जानकारी मिली है वह चौंकाने वाली है। MP ऑनलाइन की बेबसाइट से ही आरोपियों ने पीके डॉट प्रिंट के नाम से लिंक ली। उसी से पूरा फर्जीवाड़ा करने लगे। बुधवार देर शाम करीब 8 बजे कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने दबिश देकर हजारों फर्जी आईडी कार्ड जब्त की थी।

टीआई सतीश द्विवेदी के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी ब्रह्मदत्त उर्फ प्रदीप शर्मा और सृष्टि फोटो कॉपी के संचालक नरेंद्र सरसाठ ने पूछताछ में कबूला कि उन्होंने पीके डॉट प्रिंट की एक लिंक 600 रुपए में खरीदी थी। इसमें एक कार्ड के लिए ऑनलाइन 20 रुपए जमा कराना होते थे, जिससे इसमें ब्लैक एंड व्हाइट वोटर आईडी को कलर करने के साथ ही नया वोटर कार्ड भी बनकर आ जाता था।

स्कैन कर फोटो और फॉर्मेट ले लेता है पीके डॉट प्रिंट
आरोपियों के मुताबिक, यह लिंक खोलने के बाद एक पेज आता था, जिसमें किसी भी कार्ड की इमेज लेने के बाद वह स्कैन हो जाता था। एक फॉर्मेट में किसी अन्य व्यक्ति का नाम और फोटो डालने के बाद उसका आधिकारी के हस्ताक्षर किए हुए दूसरा कार्ड बनकर प्रिंट हो जाता था।

MP ऑनलाइन के नाम पर फर्जी वोटर कार्ड:इंदौर में फोटो कॉपी की दुकान से हजारों कार्ड जब्त, द्वारकापुरी थाने के सामने चल रहा था रैकेट, 1 हजार लेकर 24 घंटे में देता था

आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र सहित कई दस्तवेज मिले
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के दुकान में कम्प्यूटर के अलावा आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र सहित कई दस्तवेज और उसकी फोटो कॉपी मिली है। पुलिस को शंका है कि नरेंद्र और प्रदीप यहां अन्य दस्तावेज भी बनाते थे।

द्वारकापुरी थाने के ठीक सामने है सृष्टि फोटो कॉपी।

द्वारकापुरी थाने के ठीक सामने है सृष्टि फोटो कॉपी।

जिला निर्वाचन से अनुमति नहीं
मामले की जांच में जुटी पुलिस ने जिला निर्वाचन के अधिकारियों से भी बात की। इसमें उनकी तरफ से किसी तरह की अनुमति सृष्टि फोटो कॉपी वालों को नहीं दी गई थी। साथ ही जिला निर्वाचन के अधिकारियों ने पीके डॉट प्रिंट को भी फर्जी बताया है।

साइबर एक्सपर्ट की मदद से लेंगे जानकारी
टीआई सतीश द्विवेदी के मुताबिक, आरोपियों का रिमांड लिया जा रहा है। साइबर की टीम की मदद लेकर पीके डॉट प्रिंट की जानकारी निकाली जा रही है। यह एक तरह की फर्जी लिंक है, जो जाली दस्तावेज बनाने के काम आती है। इसके लिए पुलिस इसे बनाने वाली कंपनी की भी जानकारी जुटा रही है।

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