Rajasthan Board; 90% marks of 2.5 lakh students, 1.91 lakh seats in colleges | राजस्थान बोर्ड; सवा दो लाख छात्रों के 90% अंक, कॉलेजों में सीटें 1.91 लाख


जयपुर42 मिनट पहलेलेखक: विनाेद मित्तल/अर्पित शर्मा

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95% अंक वालों की संख्या भी 80 हजार से अधिक। - Dainik Bhaskar

95% अंक वालों की संख्या भी 80 हजार से अधिक।

  • सीबीएसई में भी यही हाल

काेरोना के कारण इस बार 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्रमोट कर दिया गया है। हालांकि 12वीं के रिजल्ट की वजह से इस बार कॉलेज में प्रवेश का गणित बिगड़ गया है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में ही इस बार सवा दो लाख से अधिक विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए हैं। सीबीएसई के परिणाम में भी यही स्थिति है।

ऐसे में कॉलेजों में प्रवेश को लेकर माथापच्ची तय है। क्योंकि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में 1.91 लाख सीटें ही हैं। जयपुर शहर के स्कूलों के परिणाम को देखा जाए तो करीब 25 से 30% विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक और करीब 8 से 10% विद्यार्थियों ने 95% से अधिक हासिल किए। इसके आधार पर देखा जाए तो राजस्थान बोर्ड की 12वीं में 2.25 लाख से अधिक विद्यार्थियों को ही 90% से ज्यादा अंक मिले हैं।

यही नहीं 95 फीसदी अंक वालों की संख्या भी 80 हजार से अधिक है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए कटऑफ 95% के आसपास रहना तय है।क्योंकि सीबीएसई के विद्यार्थी भी प्रवेश की दौड़ में रहेंगे। जयपुर में सबसे ज्यादा मारामारी राजस्थान यूनिवर्सिटी के 4 संघटक कॉलेजों में रहती है, जबकि यहां मात्र 7 हजार सीटें ही हैं।

राजस्थान बोर्ड की 12वीं कक्षा के तीनों संकायों में परीक्षा में बैठने वाले 8,59,994 छात्रों में से 8,53,969 छात्रों को उत्तीर्ण घोषित किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 8,53,074 प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। करीब 2500 ने तो 100% अंक प्राप्त किए। पिछले साल से परिणाम की तुलना करें तो 79,542 छात्र अधिक उत्तीर्ण हुए। साथ ही 3,80,612 अधिक विद्यार्थी अधिक प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए।

पिछले 4 साल के रिजल्ट का ऑडिट : फर्स्ट डिविजन वाले बढ़े

  • बड़े कॉलेजों में जहां पहली कट ऑफ 90% के आसपास रहती है, वह इस साल भी बढ़ सकती है। क्योंकि इस बार तो 12वीं में कई छात्रों के 100% तक अंक आए हैं।

एडमिशन पॉलिसी के अनुसार प्राप्तांकों के आधार पर ही एडमिशन में यदि समान अंकों वाले छात्र होते हैं तो बोनस रहित छात्र का क्रम ऊपर होता है। उसमें भी समान अंक हैं तो 10 वीं में ज्यादा अंकों वाले का क्रम ऊपर माना जाता है। परिणाम अधिक रहने के साथ साथ 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वालों की संख्या भी काफी बढ़ी है। इसलिए प्रवेश में कड़ा मुकाबला होगा। यह भी हो सकता है कि समान प्रतिशत पर एक से अधिक विद्यार्थी हो। सरकार को कुछ इस तरह से बदलाव करना चाहिए कि प्रवेश में किसी के साथ अन्याय नहीं हो।

पर्सेंटेज के आधार पर ही प्रवेश

हम तो पहले से ही यूजी, पीजी में एंट्रेंस टेस्ट से ही प्रवेश कराना चाहते हैं। कोविड में यह संभव नहीं है। पर्सेंटेज के आधार पर ही एडमिशन कर सकते हैं।
-प्रो. पीसी त्रिवेदी, कुलपति, जोधपुर यूनिवर्सिटी

सीबीएसई और आरबीएसई दोनों ही बोर्ड में 12वीं का परिणाम अधिक रहा है। इस बार कटऑफ अधिक रहना तय है। सरकार को ऐसे बदलाव करना चाहिए कि किसी के साथ अन्याय न हो।

-डॉ. संजीव सिंघल, शिक्षाविद और बीएड कॉलेज प्रिंसिपल

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