Home Minister Narottam Mishra was trapped in the flood here, rescue was done by helicopter, now everyone is forced to leave the village | 80% मकान की जगह अब मलबा, सरकार ने आटा और आलू दिए, लेकिन गांववालों के पास खाना बनाने का सामान नहीं; गृहमंत्री इसी गांव में फंसे थे


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दतिया10 घंटे पहले

कोटरा गांव में बाढ़ से नष्ट हुए मकान में सामान तलाशते ग्रामीण।

दतिया जिले के कोटरा गांव की गलियों अब बच्चों की किलकारियां नहीं गूंजती। बड़े-बुजुर्गों की चौपाल नहीं सजती। हर चेहरे पर परेशानी है। बच्चों का बस्ता और खिलौने बह गए हैं। कुछ दिन पहले तक खुशहाल गांव में मातम सा पसरा है। सिंध नदी ने ऐसी तबाही मचाई है कि हर सबकुछ बर्बाद हो गया। लोगों की गृहस्थी उजड़ गई। कच्चे मकान बह गए। पक्के मकान मलबा बन गए। अपने आशियानों को उजड़ा देखकर हर कोई आंसू बहा रहा है। अब यहां के लोग गांव छोड़ने की तैयारी में हैं। पढ़िए कोटरा गांव से रिपोर्टर पवन दीक्षित की रिपोर्ट-

यह वही गांव है, जहां सिंध नदी की बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पहुंचे थे। गांव के गलियारों में पानी हिलोरें मार रहा था। बोट पर बैठकर गांववालों से मुलाकात करने पहुंचे तो बोट पर पेड़ गिर गया। नरोत्तम मिश्रा खुद यहां फंस गए थे और हेलिकॉप्टर की मदद से गृहमंत्री ने गांव के लोगों को निकलवाया और फिर स्वयं निकले थे

बाढ़ उतरने के बाद गांव के हालात जानने पहुंची भास्कर टीम को हर तरफ बर्बादी नजर आई। घर की दहलीज से लेकर रसोई घर तक बाढ़ की गंदगी साफ नजर आ रही थी। लोग इस गंदगी को साफ करके जरूरत का सामान बटोर रहे हैं। जो मकान जमींदोज हो चुके हैं, उन मकानों के मलबे को हटाकर कई लोग सामान की तलाश में जुटे हैं। यहां के लोग दिनभर मकानों की सफाई कर रहे हैं। रात में सोने के लिए रिश्तेदारों के घर जा रहे हैं।

इस गांव में अस्सी प्रतिशत मकान खराब हो चुके है। दैनिक भास्कर टीम ने उस मकान को देखा जिसकी छत से गृहमंत्री मिश्रा एयर लिफ्ट हुए थे। वह मकान भी धराशायी हो चुका है। इस मकान के मालिक ने भी गांव छोड़कर जाने का मन बना लिया है। अपने उजड़े आशियाने को देखकर शांति बाई कहती हैं, ‘मेरी दो बच्चियों की शादी होने वाली है। बाढ़ में सब कुछ नष्ट हो गया। अब शादी को कैसे करेंगे। यह सबसे बड़ी मुसीबत है।’

दतिया का कोटरा गांव बाढ़ के पानी से बर्बाद हुआ।

दतिया का कोटरा गांव बाढ़ के पानी से बर्बाद हुआ।

आटा और आलू मिला, अब बनाए कैसे?

  • गांव के माधौ सिंह का कहना है कि बाढ़ में सब कुछ तबाह हो गया। सरकार ने आटा और आलू दे दिए ,अब खाना कैसे बनाएं? बर्तन बचे नहीं, लकड़ियां गीली हैं।
  • कमलेश का कहना है कि बाढ़ में सब कुछ बह गया। सरकार ने आटा और आलू दिया। अब इस आटे को कैसे रोटियां बनाए, कैसे सब्जी पकाएं क्योंकि बाढ़ में सब बह गया।
  • उत्तम सिंह का कहना है कि सब कुछ तबाह हो गया। मकान बहने की वजह से तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर है।

अनाज बचा न भूसा
गांव के लोगों का कहना है कि बाढ़ से बर्बादी इस तरह हुई कि सब कुछ बह गया है। अब परिवार और मवेशियों को खिलाने के लिए न अनाज बचा और ना ही भूसा। सब कुछ बाढ़ में नष्ट हो चुका है।

बाढ़ से जमींदोज हो चुके मकान।

बाढ़ से जमींदोज हो चुके मकान।

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