After the flood, the mud spread in the villages, the funeral procession took out in the mud in Sangoli village, the dead body kept falling on the way | बाढ़ के बाद गांवों में पसरा कीचड़, सांगोली गांव में कीचड़ मे निकाली शवयात्रा, रास्ते में गिरते-गिरते बचा शव


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मुरैना9 घंटे पहले

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सांगौली गांव में दलदली रास्ता - Dainik Bhaskar

सांगौली गांव में दलदली रास्ता

  • अपने पीछे गंदा पानी से लेकर दलदल व कीचड़ छोड़ गई बाढ़

जिले की चंबल व क्वारी नदी में आई बाढ़ तो खत्म हो गई लेकिन अपने पीछे बहुत सी समस्याएं छोड़ गई है। इसमें सबसे बड़ी समस्या कीचड़ व गंदे पानी की है। लोगों के पास जहां पीने को साफ पानी नहीं है वहीं दूसरी तरफ गांवों की जमीन व सड़कें दलदली हो गई हैं। गुरुवार को यह हालत हो गई कि अंबाह कस्बे के सांगोली गांव में एक व्यक्ति की शवयात्रा घुटनों तक कीचड़ में धंसने के बाद निकाली गई। इस दौरान शव गिरते-गिरते बचा। यहां बता दें, कि यह स्थिति अकेले सांगोली गांव की नहीं है। अंबाह-पोरसा के दर्जनों गांवों की यह स्थिति है। यहां जहां जीना मुश्किल है वहीं मरना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। मरे व्यक्ति के शव को जलाने की समस्या है। खेतों में पानी भरा है। शमशानों में पानी भरा है। रास्ता दलदली है। निकलने को जगह नहीं है। लोग आज भी गांव छोड़कर स्कूलों में डेरा डाले हुए हैं। महिलाएं व बच्चे इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जब पानी सूख जाए और कीचड़ व दलदल खत्म हो तो वह अपने घर में जाकर साफ-सफाई करें।

गांव की दलदली रास्ता

गांव की दलदली रास्ता

एक किलोमीटर की दूरी में बदले गए कंधा देने वाले
सांगोली गांव के शमशान की दूरी गांव से मात्र एक किलोमीटर दूर है। 87 वर्ष के कमल सिंह पुत्र परशुराम तोमर का निधन हो गया था। गांव से शमशान जाने का रास्ता बेहद दलदली व कीचड़ भरा था। लोग शवयात्रा लेकर निकले तो घुटनों तक कीचड़ में फंस गए। कीचड़ में घुटनों तक चलने के कारण शवयात्रा ले जाने वाले लोग जल्द ही हांफने लगे। थकने के कारण एक जगह शव के गिरने तक की नौबत आ गई। इस पर साथ चलने वाले लोग उनकी जगह कंधा देने लगे। इस तरह जैसे-तैसे शव को शमशान तक पहुंचाया जा सका।
पीने को नहीं पानी, बीमार हो रहे लोग
बाढ़ का गंदा पानी कुओं तथा बावड़ियों में भर गया है। यहां तक कि हैण्डपंप तक से गंदा व कीचड़युक्त पानी आ रहा है। गंदा पानी पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। अंबाह क्षेत्र के भागना, नीबरी पुरा, घार, रतनबसई आदि दर्जनों गांवों में पीने के पानी का संकट गहरा रहा गया है। लोगों के पीने के लिए पानी नहीं है। कुओं में गंदा पानी आ रहा है। जिसको पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं।

कुंआ से निकल रहा गंदा पानी

कुंआ से निकल रहा गंदा पानी

हमारी बहन पड़ गई बीमार
घार गांव के शेलेन्द्र सिंह कुशवाह ने बताया कि गंदा पानी पीने से उनकी बहन बीमार पड़ गई। उसे पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा है। इसके साथ ही गंाव में गंदगी से मच्छर व कीड़े निकल रहे हैं जो रात में काट जाते हैं सुबह उठने पर शरीर पर जगह-जगह चकत्ते से निकल आते हैं।
मरे जानवरों की उठ रही दुर्गंध
नीबरीपुरा गांव के रविन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि उनके गांव में कई जानवर बाढ़ की चपेट में आकर मर गए हैं। उनके मरने से लाश फूल गई हैं। लाश फूलने के बाद अब सड़ने लगी हैं। उनकी लाशों से दुर्गंध आ रही है। जिसकी वजह से गांव में रहना मुश्किल भरा हो गया है। अगर उन्हें समय रहते नहीं हटाया गया तो बड़ी बीमारी का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
चूल्हे फूट गए, लकड़ी बह गईं, कैसे बनाएं खाना
कई गांवों में बाढ़ की छपेट में आकर घर बर्बाद हो गए हैं। कई घरों में कमरों में पानी भरने से सीलन हो गई है। दूल्हा-चौके की पूरी गृहस्थी पानी में बह गई। कच्चे चूल्हे फूट गए और लकड़ियां पानी में बह गई। जो बच गईं वह गीली हैं। उन्हें जलाना नामुमकिन है। लिहाजा जो लोग गांव में पहुंच भी रहे हैं उनके सामने समस्या यह है कि वे खाएं तो खाएं क्या? खाना बन नहीं सकता, लिहाजा वे अब भी वापस लौट कर गांव के बाहर बने स्कूलों में मौजूद अस्थाई शिविरों में डेरा डालकर रहने को मजबूर हैं।

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