These migrants are stuck abroad for 730 days, could not see their mother, the crisis of attending the marriage of one’s sister | 730 दिन से विदेश में अटके हैं ये अप्रवासी, काेई मां के अंतिम दर्शन नहीं कर सका, किसी के बहन की शादी अटैंड करने का संकट


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सीकर40 मिनट पहलेलेखक: राजेश सिंघल

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थाईलैंड, जापान, मस्कट, चीन और हांगकांग में रहने वाले राजस्थानियों ने बताई अपनी परेशानियां। - Dainik Bhaskar

थाईलैंड, जापान, मस्कट, चीन और हांगकांग में रहने वाले राजस्थानियों ने बताई अपनी परेशानियां।

  • घर नहीं लाैट पा रहे अप्रवासी राजस्थानियाें के हालात पर विशेष रिपाेर्ट, कई देशाें की सरकाराें ने बाहर जाने पर लगा रखी है पाबंदी

काेराेना प्राेटाेकाॅल में कई देशों की सरकारों ने विदेश आने-जाने के लिए वन-वे पॉलिसी लागू कर रखी है। आवाजाही की पाबंदियों ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों पर असर डाला है। भास्कर ने अलग-अलग देशों में रहने वाले राजस्थानियाें से बात की ताे पता चला कि कई परिवार तो 730 दिन से वतन नहीं लौट पा रहे हैं।

इन लोगों का कहना है कोविड नियमों का ऐसा डर है कि इंडिया आ जाएं और वहां नया कुछ लागू हो जाए तो पूरा कारोबार चौपट हो सकता है। पहले चरण में जब काेराेना आया ताे उम्मीद थी कि कुछ दिन में हालात सामान्य हाेने पर घर लाैट सकेंगे, लेकिन दूसरी लहर ने भारत काे रेड जाेन में ला दिया। अप्रवासियाें के लिए इनकमिंग फ्लाइट बंद हैं।

मनीष पारीक, सीकर (अभी बैंकाॅक में) : दो साल से परिवार से नहीं मिल पाए

मनीष 2017 से बैंकाॅक में हैं। उन्हाेंने बताया कि 2 साल से परिवार वालाें से नहीं मिल सका हूं। यहां परिवार के लाेग नहीं हाेने से मित्रों के सहयोग से काम चल रहा है। काेराेना के चलते भारत के लिए हवाई यात्रा पर प्रतिबंध है। यहां काेराेना की तीसरी लहर आ चुकी है। थाइलैंड में राेज 20 से 22 काेराेना केस मिल रहे हैं।

माैताें का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। सवा महीने के इंतजार के बाद वैक्सीन लगी है। यहां चाइनीज वैक्सीन सिनाेबेक-सिनाेफर्मा लगाई जा रही है, जिसे लोग तवज्जो नहीं दे रहे हैं तो अब यूके की एस्ट्राॅजेनिका लगाने की शुरुआत हुई है।

नगेंद्र पारीक, सीकर (अभी हांगकांग में) : फ्लाइट का किराया बढ़कर 1.20 लाख हुआ

मैं हांगकांग में काम करता हूं। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को रेड श्रेणी में रखा हुआ है, जिससे भारत के लिए सीधी फ्लाइट नहीं है। काेराेना से पहले भारत के लिए 30 से 35 हजार रुपए में हवाई टिकट मिल रहा था, जो अब 1 लाख 20 हजार तक पहुंच गया है।

हांगकांग में बिना मास्क के हाेने पर 5 हजार हांगकांग डाॅलर की पैनल्टी है, जाे भारतीय मुद्रा में लगभग 47 हजार रुपए है। यहां कोरोना के स्थानीय मामले नहीं हैं। सिर्फ बाहर से आने वालों के ही कोरोना केस आ रहे हैं। इनको 21 दिन क्वारेंटाइन किया जाता है और 5 से 7 बार जांच हाेती है।

प्रतीश जोशी, झुंझुनूं (अभी मस्कट में) : डेल्टा वेरिएंट की एंट्री से बंद हैं फ्लाइट

मैं गुढ़ागौड़जी का हूं। परिवार जयपुर में शिफ्ट है। मैं मस्कट में सीए हूं। काेविड प्रोटोकॉल की वजह से मस्कट में इनकमिंग फ्लाइट बंद हैं, जिससे डेढ़ साल से घर नहीं आ सका हूं। जुलाई में बहन की सगाई के कार्यक्रम में नहीं जा पाए थे। नवंबर में बहन की शादी है, इसलिए घर भी जाना जरूरी है।

बहन के विवाह संबंधी काम भी देखने हाेंगे। दुबई-कतर-कुवैत में हवाई यात्रा शुरू हो गई है, लेकिन मस्कट में इनकमिंग फ्लाइट बंद है। मस्कट में ईद के बाद लॉकडाउन लगा दिया था क्योंकि यहां डेल्टा वेरिएंट की एंट्री हाे चुकी है। रोज 4 से 5 हजार केस आ रहे हैं।

मयूर डागा, जयपुर (अभी चीन में) : बॉर्डर लॉक होने से घर वापसी नहीं हो पा रही

मैं जयपुर के जौहरी बाजार क्षेत्र का रहने वाला हूं। अभी काम के सिलसिले में चीन के शेनझेन प्रांत में रहता हूं। बार्डर लाॅक हाेने के कारण घर नहीं जा पा रहा हूं। मई में मां का निधन हो गया था, लेकिन कोविड के हालातों की वजह से भारत नहीं आ सका। इससे उनके अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाया।

हालांकि चीन में इस वक्त कोविड के हालात सामान्य हैं। इसकी वजह है कि लोग सतर्कता बरत रहे हैं। उदाहरण के लिए बिना मास्क घर से नहीं निकलते हैं। यहां प्रोटोकॉल को लेकर काफी सख्ती बरती जा रही है इसलिए लोग लापरवाही भी नहीं करते हैं।

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