The building construction map was passed on government land, the case of Badanpur, in 2003, the administration removed the possession and handed it over to the corporation. | शासकीय जमीन पर पास कर दिया भवन निर्माण का नक्शा, बदनपुर का मामला, 2003 में प्रशासन ने कब्जा हटाकर सौंपा था निगम को


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जबलपुर19 मिनट पहले

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शासकीय जमीन पर निर्माण के साथ प्लाट बेचने का बोर्ड भी लग गया। - Dainik Bhaskar

शासकीय जमीन पर निर्माण के साथ प्लाट बेचने का बोर्ड भी लग गया।

18 साल पहले प्रशासन ने जिस शासकीय भूमि से कब्जा हटाकर नगर निगम को सौंपा था। उसी जमीन पर नगर निगम ने निजी भवन का नक्शा पास कर दिया। दरअसल ये गफलत और तेजी सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत के बाद हुई। नक्शा पास कराने वाले ने सीएम हेल्पलाइन में मामले की शिकायत कर दी थी। अब निगम अपनी लापरवाही राजस्व विभाग के माथे मढ़ने में जुटा है। नगर निगम आयुक्त संदीप जीआर ने भवन अधिकारी व तहसीलदार को मामले जांच सौंपा है।

शारदा मंदिर के आगे बदनपुर में खसरा नंबर 181, 182, 183 में रकबा 1.169 हेक्टेयर भूमि शासकीय है। इस पर जमीन पर सुशील यादव नाम के व्यक्ति ने चारों ओर से फेंसिंग कर कब्जा कर लिया था। आरोपी ने एक कमरे का निर्माण भी करा लिया था। इस मामले में शिकायत के चलते 2003 में तत्कालीन नजूल के नायब तहसीलदार विवेक त्रिपाठी और नगर निगम के उपायुक्त राकेश अयाची ने कब्जा हटवाने का काम किया था। इस शासकीय जमीन का आधिपत्य नगर निगम को सौंप दिया गया था। इस जमीन को नगर निगम ने आधिपत्य में लेते हुए कटीले तारों की फेंसिंग कर दी थी। न्यायालय ने भी आदेश में नगर निगम को अपने हक का बोर्ड लगाने को कह चुकी है। बावजूद नगर निगम इस शासकीय जमीन पर अपना कब्जा बरकरार नहीं कर पाया।

शासकीय जमीन में ये बना हुआ है

हैरानी की बात ये है कि यहां पानी की टंकी, सामुदायिक भवन और शासकीय स्कूल का निर्माण किया गया है। इसके बगल में ये खाली जमीन पड़ी थी। यहां पर भी भविष्य में लोगाें की सुविधा के लिए बारातघर आदि का प्रस्ताव था। पर सैनिक सोसायटी कॉलोनी के अशोक नायक ने इस जमीन का सौंदा कर दिया। उन्होंने खसरा नंबर 162/5 की जमीन को पहले सीके शुक्ला को बेचा और अशोक ने वैभव शुक्ला आदि को जमीन रजिस्ट्री कर दी।

शासकीय जमीन पर जारी है अवैध निर्माण।

शासकीय जमीन पर जारी है अवैध निर्माण।

जमीन कहीं, और निर्माण कहीं किया जा रहा है

इस मामले में दिलचस्प ये है कि वैभव शुक्ला आदि शासकीय जमीन को ही अपना खसरा नंबर 162/5 की जमीन बताते हुए निर्माण करा रहे हैं। जबकि उनकी जमीन कहीं और है। नगर निगम में शिकायतों के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। बताते हैं कि इसक पीछे कुछ रसूखदारों का हाथ है। पूर्व पार्षद दिनेश सिंह सिंगरौल ने आरोप लगाए कि शासकीय जमीन पर जानबूझ कर कब्जा कराया जा रहा है। ये जमीन यहां के लोगों के हित में उपयाेगी है। पास में ही शारदा मंदिर है। यहीं नहीं आरोपियों ने यहां प्लाट बेचने का बोर्ड भी लगा दिया है। सीके शुक्ला को मालिक बताया गया है। वहीं वैभव शुक्ला व वैभव लालवानी का मोबाइल नंबर प्लाट बेचने वाले के तौर पर दर्शाया गया है।

बिना स्थल जांच किए ही पास कर दिया नक्शा

शासकीय जमीन पर नक्शा पास करने में नगर निगम के अधिकारियों ने गजब की तेजी दिखाई। दरअसल वैभव शुक्ला की ओर से अशोक नायक के नाम से नक्शा पास करने का आवेदन नगर निगम के कॉलोनी सेल और भवन शाखा में लगाया गया था। नक्शा पास न होने पर उसने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर दी। वहां से प्रकरण की मॉनीटरिंग हुई तो आनन-फानन में नक्शा पास कर दिया गया। जबकि कॉलोनी सेल और भवन शाखा के इंजीनियर को मौके पर निरीक्षण करने के बाद नक्शा पास करने का प्रावधान है।

इन अधिकारियों की मिलीभगत आ रही सामने

नगर निगम के भवन अधिकारी आरके गुप्ता, काॅलोनी सेल के सत्येंद्र दुबे, इंजीनियर अनुपम शुक्ला की मिलीभगत सामने आ रही है। उक्त अधिकारियों की जवाबदारी थी कि नक्शा पास करने से पहले स्थल देखकर पास करें। अब प्रकरण सामने आने के बाद भी निर्माण कार्य पर रोक लगाने की कवायद शुरू नहीं की गई। नगर निगम आयुक्त संदीप जीआर के मुताबिक राजस्व विभाग ने जमीन का सीमांकन नहीं किया था। इस कारण गफलत हुई है। भवन अधिकारी व तहसीलदार को जांच सौंपी गई है।

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