Stolen consumer data from where they worked; Formed a thug company, took accounts at 10% commission to get money | जहां काम करते थे वहां से उपभोक्ताओं का डेटा चुराया; ठग कंपनी बनाई, पैसे मंगाने को 10% कमीशन पर खाते लिए


जयपुर2 घंटे पहलेलेखक: इशांत वशिष्ठ

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पुलिस ने वीरेंद्र उपाध्याय नामक पीड़ित से 2.5 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा 13 फरवरी को किया था। - Dainik Bhaskar

पुलिस ने वीरेंद्र उपाध्याय नामक पीड़ित से 2.5 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा 13 फरवरी को किया था।

  • 2.50 करोड़ की ठगी के मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार हुआ

ढाई करोड़ रुपए की ठगी के मामले में शास्त्री नगर थाना पुलिस ने बुधवार को एक और मुख्य आरोपी अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वीरेंद्र उपाध्याय नामक पीड़ित से 2.5 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा 13 फरवरी को किया था। 8 मार्च 2020 को पहली गिरफ्तारी की गई थी।

इसके बाद जब परतें खंगाली गईं तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। ‘भास्कर’ की पड़ताल में आया कि गिरोह ने ठगी के लिए कंपनी खड़ी की। आरोपियों ने अपनी पुरानी कंपनियों डेविस वैल्यू क्लब, एचएनआई क्लब, वैल्यू क्लब, हॉलीडे सर्विस से उपभोक्ताओं का डेटा चोरी किया और फिर ठगी की वारदातें की।

इसकी शुरुआत 2013 में हुई। देवेंद्र त्यागी और सोनू कॉल सेंटर पर काम करते थे। वीरेंद्र से आरोपी 2015 तक 4 ठगी कंपनियों के माध्यम से 54 लाख की ठगी कर चुके थे। दोनों आरोपियों ने 2015 में कॉल सेंटर खोला। फिर अलग-अलग नंबराें से पीड़ित से संपर्क करना शुरू दिया। जयपुर, जोधपुर, पाली सहित अन्य जगहों पर 27 से ज्यादा बैंक खाते खुलवाए। खातों से रुपए निकलवाने के लिए एक व्यक्ति को अलग से नियुक्त किया गया।

देखिए! इन 15 किरदारों को जो ठगी का पूरा चैनल संभालते थे…कई आरोपी कॉल सेंटर पर काम करते थे तो कुछ खुद का ही कॉल सेंटर चलाते थे

  • पवन खत्री : जोधपुर का रहने वाला। पीएनबी, सिंडीकेट, यूनियन बैंक, महाराष्ट्र बैंक, कोटक महिंद्रा और एसबीआई में 12 चालू खाते फर्म के नाम पर खुलवाए। 30 से 40 हजार रुपए दिए। गिरफ्तार पहला आरोपी है।
  • घनश्याम : पाली निवासी। आधार का पता बदलकर जयपुर में एनएफटी सर्विस के नाम पर फर्म खोली। तीन खाते ऑफ बड़ौदा व महाराष्ट्र बैंक में। चेक बुक पवन खत्री को दिया था।
  • राजेंद्र सिंह : पाली का रहने वाला है। इसने पवन को दो खाते खुलवा कर एटीएम और चेक बुक दिए थे। राजेंद्र सिंह ने ही बचत खाते खुलवाए। इसके लिए 10 से 15 हजार रुपए मिले थे। बैंक की हर गतिविधि में शामिल।
  • ब्रजेश कुमार- बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है। खुद के ही खाते में रुपए डालने और निकालने का काम करता था। दस प्रतिशत राशि निकाल कर देता था। यह अनिल कुमार के संपर्क में रहता था।
  • मनीष सोनी-तीन खाते एसबीआई, यूनियन सेंट्रल, बैंक बैक ऑफ इंडिया में खुलवाए। सभी खातों में एक ही मोबाइल नम्बर था। नेट बैंकिंग से रूपए निकालता व डालता था।
  • अशोक कुमार- गाजियाबाद का रहने वाला। साइबर कैफे चलाता था। यह निजी कंपनी में काम कर चुका है। ठगी के लिए सैलरी अकाउंट का उपयोग करता था। देवेंद्र खाते से रूपए निकाल कर कमीशन रखता था। यह किराए पर लेने वाले अकाउंट का 10 फीसदी हिस्सा देता थेे।
  • दीपेश चौहान- ग्रेटर नोएडा निवासी। इसका काम खातों में आने वाली रकम का हिसाब रखना। किता पैसा आया? कितना पैसा किसे देना है? दीपेश अपने साथी हर्षवर्धन ठाकुर के साथ मिल कर काम करता था। प्रदीप से संपर्क में रहता था।
  • हर्षवर्धन ठाकुर- ग्रेटर नोएडा में कॉलसेंटर चलाने का काम करता था। इसके पास से पुलिस ने कार, बाइक व अन्य सामान बरामद किया था। यह अनिल के साथ था।
  • प्रदीप- यह पहले नोएडा स्थित श्रीधर इंश्योरेंस कंपनी के कॉलसेंटर में काम करता था। जयपुर में कंपनी आरबी सर्विसेज खोली। इसके नाम पर करंट अकाउंट खुलवाया। इसमें में रुपए ट्रांसफर किया जाता था। यह ठग गिरोह का हिसाब किताब और अकाउंट का विवरण रखता था।
  • मोहित गंगवाल – कॉल सेंटर की जिम्मेदारी। मुरादाबाद में ठगी में गिरफ्तार हो चुका है। इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हुए उपभोक्ताओं के नम्बर चोरी किए। बातचीत करने-कराने की जिम्मेदारी भी इसी पर। प्रदीप के संपर्क में था।
  • गौरव- मोहित के साथ नोएडा की कंपनी आईआईएफएल में काम करता था। इसके बाद कॉलसेंटर में आ गया। जिसे कोरोना के दौरान बंद कर दिया गया।
  • देवेंद्र त्यागी- मास्टमाइंड में एक है। लोगों से खाते किराए पर लेता था। ओपन मार्केटिंग से एमबीए। 2013 से डेविस वैल्यू से जुड़ा। इसने पीड़ितों के नंबर चुराए। इसके बाद सोनू के साथ मिलकर पूरी टीम तैयार की।
  • सोनू गिरी- देवेंद्र त्यागी का खास साथी था। कॉलसेंटर चलाता था। इसके साथ ही ठगी से आने वाली रकम का 70 प्रतिशत हिस्सा आपस में बांटता था। इसके बाद खाते जुटाने वाले व्यक्ति को देता था।
  • पंकज- लोगों से खाते खुलवाने का काम करता था। इसके लिए उसे अलग से 10 प्रतिशत कमीशन भी लेता था। बीकॉम पास किया था। रोहित के संपर्क में था।
  • रोहित- मार्केटिंग में पीजी है। खातों रुपए निकालने की जिम्मेदारी। टूर एण्ड सर्विस के नाम से ऑफिस खोला था। वहां पर काम करने वाले युवक के कागज पर खाते खुलवाए थे। यह आरोपी फरार है।

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