Sorry for the inconvenience…Mhow-Sanawad section work still not started after 13 years | असुविधा के लिए खेद है…महू-सनावद सेक्शन का काम 13 साल बाद भी शुरू नहीं


इंदौर7 घंटे पहले

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आलोक कंसल जीएम, पश्चिम रेलवे - Dainik Bhaskar

आलोक कंसल जीएम, पश्चिम रेलवे

  • महू-खंडवा गेज कन्वर्जन प्रोजेक्ट की करेंगे समीक्षा, एक्सपर्ट बोले- महू के आगे घाट सेक्शन का काम सबसे चुनौतीपूर्ण, इसकी डिजाइन ही फाइनल नहीं कर पाया रेलवे

महू-खंडवा-अकोला गेज कन्वर्जन को बजट में सबसे ज्यादा 350 करोड़ मिले, लेकिन अभी काम बंद है। सबसे अहम महू-सनावद सेक्शन में प्रोजेक्ट मंजूरी के 13 साल बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। इसी प्रोजेक्ट की गुरुवार को पश्चिम रेलवे के जीएम आलोक कंसल समीक्षा करेंगे। उम्मीद है कि इसका जल्द काम शुरू होगा। बता दें कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से इंदौर-मुंबई की दूरी 70 किमी और उत्तर-दक्षिण ट्रेनों की दूरी 170 किमी तक कम हो जाएगी।

जो सेक्शन सबसे कठिन, उस पर ही इतनी देरी क्यों?
रेलवे पैसेंजर एमीनिटिज कमेटी के पूर्व सदस्य नागेश नामजोशी के अनुसार रेलवे को चाहिए कि महू के आगे घाट सेक्शन के लिए अब युद्ध स्तर पर तैयारी की जाए, क्योंकि यही सेक्शन सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण है। रेलवे जल्द इसका अलाइनमेंट फाइनल करे। रेलवे बोर्ड से इसका पॉइंट टू-पॉइंट सर्वे फाइनल हो। ऐसे में अब संभावना है कि नौ किमी की दूरी और बढ़ जाए। इसमें ज्यादातर जमीन वन विभाग की है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी है। ऐसे में चाहिए कि रेलवे पहल करे और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करे, ताकि जल्द से जल्द जमीन अधिग्रहण हो।

गेज कन्वर्जन प्रोजेक्ट

  • प्रोजेक्ट की लागत: 5912 करोड़ रुपए
  • अब तक खर्च किए: 2231 करोड़ रुपए
  • 472.64 किमी का कुल गेज कन्वर्जन रतलाम से अकोला के बीच होना था, इसमें से अब तक 276 किमी का काम पूरा हुआ

काम अधूरा पड़ा : यह पूरा प्रोजेक्ट रतलाम-इंदौर-खंडवा-अकोला है। रतलाम से इंदौर-महू का काम हो गया। अकोला से खंडवा, वहां ओंकारेश्वर के बीच भी अधूरा है।

सिर्फ सर्वे चल रहा : इस पूरे सेक्शन में सबसे महत्वपूर्ण है महू के आगे घाट सेक्शन का काम, इस काम के लिए रेलवे ने अभी तक प्लानिंग नहीं की है, सर्वे ही चल रहा

जीएम से समय नहीं मिलने पर नाराजगी

कंसल गुरुवार शाम को इंदौर आएंगे। मिलने के लिए रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्यों ने अफसरों से समय मांगा था। समय नहीं मिलने पर जगमोहन वर्मा ने नाराजगी जताई।

एक्सपर्ट

ऐसी स्थिति में 10 साल में भी पूरा नहीं होगा काम
जेडआरयूसीसी मेंबर अजीत सिंह नारंग ने कहा कि जिस गति से काम हो रहा है, उसे लेकर यह प्रोजेक्ट 10 साल में भी पूरा नहीं होगा। उन्होंने जीएम को पत्र लिखा कि 13 साल में भी सर्वे, प्लानिंग, डिजाइनिंग, जमीन अधिग्रहण नहीं हो सका है। अब घाट सेक्शन में रेलवे ने निर्णय लिया कि 1:100 ग्रेडियंट की बजाय 1:150 ग्रेडियंट के आधार पर काम किया जाएगा। इससे फिर से चार साल ज्यादा लगेंगे।

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