Heard Rajasthan’s Scotland from the mouth of bloggers, could not stop himself, reached Banswara without delay, got entangled in questions on the first day itself | ब्लागर्स के मुंह से राजस्थान का स्कॉटलैंड सुना तो खुद को नहीं रोक सके, बिना देर लगाए पहुंच गए , पहले दिन ही सवालों में उलझे


  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Banswara
  • Heard Rajasthan’s Scotland From The Mouth Of Bloggers, Could Not Stop Himself, Reached Banswara Without Delay, Got Entangled In Questions On The First Day Itself

बांसवाड़ाएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक
कमल रामवानी ' सारांश' - Dainik Bhaskar

कमल रामवानी ‘ सारांश’

फक्कड़ घुमक्कड़ के किस्से (किताब) से लोकप्रियता हासिल करने वाले ट्रेवलिंग एवं फूड एक्सपोजर कमल रामवानी “सारांश” की कलम अब 100 टापुओं के शहर यानी बांसवाड़ा के लिए चलेगी। रामवानी दो दिन तक बांसवाड़ा की खास जगहों की खाक छानेंगे। उन जगहों पर जाएंगे, जहां की विशेषताओं से पर्यटक बेखबर है। इस बार वह उनकी कलम केवल बांसवाड़ा की खूबसूरती के लिए चलेगी। अब तक वह किताबों और सोशल मीडिया के मंच पर स्थान विशेष के साथ वहां के लजीज व्यंजनों की जानकारी लोगों को परोसते थे। लेकिन, इस बार वह केवल पर्यटन स्थलों को किताब में जगह देंगे। रामवानी की मानें तो टूरिज्म विभाग से हायर ब्लॉगर्स के मुंह से उन्होंने बांसवाड़ा की तारीफ राजस्थान के स्कॉटलैंड के तौर पर सुनी थी। बस तभी उन्होंने बांसवाड़ा आने का मानस बना लिया था। दैनिक भास्कर की टीम से मुलाकात में रामवानी ने बताया कि कुछ दिन पहले ब्लागर्स से बांसवाड़ा की पहचान, राजस्थान के स्कॉटलैंड के तौर पर सुनी थी। उन्हें पता चला था कि बरसात के दिनों में यहां की अरावली पर्वत मालाएं पर्यटकों को बड़ा ही सुकुन देने वाली हैं। यह सुनकर वह खुद को नहीं रोक सके। बिना देर लगाए बांसवाड़ा की सैर के लिए निकल पड़े। रामवानी ने बताया कि बांसवाड़ा में वह वाइल्ड लाइफ और टूरिज्म फोटोग्राफर भरत कंसारा की मदद से वह बांसवाड़ा की खास आकर्षण वाली जगहों को फोकस करेंगे। इनमें चाचा कोटा, अरथूना, सिंगपुरा का कागदी फाल, जुआ फाल जैसी कई खूबसूरत जगह होंगी।

डूंगरपुर से बांसवाड़ा के बीच ऐसे नजारों ने कराया विदेशी धरती का अहसास।

डूंगरपुर से बांसवाड़ा के बीच ऐसे नजारों ने कराया विदेशी धरती का अहसास।

रामवानी की मानें तो वह पहले से ही बांसवाड़ा के बारे में परिचित हैं, लेकिन इस बार उनकी कलम में बांसवाड़ा विशेष होगा। उन्होंने कहा कि डूंगरपुर से बांसवाड़ा आते समय सड़क के सफर वास्तव में यादगार रहा है। तब हरी-भरी पहाड़ियों के बीच से गुजरते समय उन्होंने बड़ा राेमांच महसूस किया। उनकी मानें तो सड़क के इस नजारे को कैमरे में कैद कर किसी को यह बोला जाए कि वह विदेश की धरती पर खड़े हुए हैं तो कोई भी ऐसे नजारों को देखकर उनकी बात को सच मान लेगा।

वर्ष 2020 में चर्चा में रही यह किताब।

वर्ष 2020 में चर्चा में रही यह किताब।

ऐसे आए चर्चा में
बेसिक तौर पर रामवानी ट्रेवल एजेंट हैं, जो मूलत: भीलवाड़ा से हैं। वह वर्ष 2013 से लोगों को विदेश घूमने के लिए भेजते हैं। अकेले घूमने की आदत के बीच वह 2015 से 2019 तक विर्लय जगहों पर घूमते रहे। जून 2019 में वह हिमाचल गए। वहां पर ऐसी जगह, जहां आम पर्यटक नहीं पहुंचता है यानी तीर्थन वैली, पार्वती वैली, शांगड़, गियागी, रोपण, निहारिणी जैसी जगहों पर घूमे। इसके बाद सितम्बर 2019 में बनारस यात्रा पर रहे। वहीं से सोशल मीडिया पर ट्रेवल एंड फूड एक्सपोजर के तौर पर नाम कमाया। इसके बाद वर्ष 2020 में फक्कड़-घूमक्कड़ के किस्से (यात्रा और स्वाद की अनंत कथाएं) किताब लिखी, जो अमेजन की बेस्ट सेलिंग वाली किताबों में शामिल हुई। अगस्त 2020 में यह किताब टॉप ट्रेन में शामिल थी। सोशल मीडिया के मंच पर उनकी यात्रा को करीब 12 लाख लोगों ने पसंद किया। वहीं 30 हजार लोगों ने शेयर किया। इसके बाद से लोगों को सही की जानकारी देना उनका जुनून बन गया है।

मानचित्र पर बांसवाड़ा।

मानचित्र पर बांसवाड़ा।

बांसवाड़ा पहुंचते ही चिंता सताई
बांसवाड़ा पहुंचने के बाद से रामवानी को एक बात चिंता सता रही है। उनकी मानें तो दक्षिण राजस्थान का बांसवाड़ा इन दिनों सोशल मीडिया और खबरों के माध्यम से चर्चा में बना हुआ है। उनकी हर संभव कोशिश रहेगी कि उनके माध्यम से भी पर्यटक बांसवाड़ा तक पहुंचे। लेकिन, उनकी चिंता यह है कि बांसवाड़ा आने वाले पर्यटकों को इन जगहों पर सुरक्षा के साथ कौन घुमाएगा। उसे किस स्तर पर सहयोग मिलेगा। वह यहां आकर कहां ठहरेगा। हालांकि, रामवानी ने कहा कि संभव हुआ तो वह इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर और पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि से मिलेंगे। सरकार का ध्यान यहां पर पर्यटन को डवलप करने के लिए खीचेंगे।

फूड पर फोकस नहीं
रामवानी की सोच में बांसवाड़ा में फूड को लेकर कोई ऐसी खास बात नहीं है। उनकी मानें तो यहां पोहे-समोसे और जलेबी के अलावा कुछ ज्यादा खास नहीं है। यह सभी जगह का कॉमन टेस्ट है। लेकिन, बांसवाड़ा की नजर में उन्हें हजारी के पोए, जो रात को 12 बजे लोग खाने पहुंचते हैं। पुराने बस स्टैंड की लस्सी, बाबू भाई के समोसे जैसी खासियत को भी पर्यटकों तक पहुंचाना चाहिए।

खबरें और भी हैं…



Source link

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*