Desire swept in the flood; 2500 crore crops destroyed in Hadaiti | बाढ़ में बहे अरमान; हाड़ाैती में 2500 कराेड़ की फसलें तबाह


काेटा32 मिनट पहलेलेखक: पंकज मित्तल

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संभाग के अधिकतर इलाकों में अभी भी खेतों में भरा है पानी। - Dainik Bhaskar

संभाग के अधिकतर इलाकों में अभी भी खेतों में भरा है पानी।

  • इटावा, सुल्तानपुर, केपाटन, कापरेन, तालेड़ा, किशनगंज, मांगराेल, खाताैली में ज्यादा तबाही
  • साेयाबीन की लगभग 80% फसल खराब, किसानाें काे हाेगा 1600 कराेड़ का नुकसान
  • मूंग में 120 करोड़, उड़द में 612 कराेड़ व धान फसल में लगभग 187 कराेड़ रुपए का खराबा

बारिश ने हाड़ाैती में जमकर तबाही मचाई है। कई इलाकाें में अभी भी खेताें में पानी भरा है, जिससे फसलें तबाह हाे गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान काेटा के इटावा, सुल्तानपुर, खाताैली, कापरेन, तालेड़ा, लाडपुरा व बारां के किशनगंज, सीसवाली व मांगराेल की तरफ हुआ है। राज्य सरकार की तरफ से खराबे का सर्वे चल रहा है।

केंद्र सरकार की एक टीम भी आज सर्वे करेगी। इससे पहले फसल खराबे का अनुमान लगाने के लिए भास्कर टीम ने संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्राें में पड़ताल की और किसानाें व जनप्रतिनिधियाें से बात की। हाड़ाैती में साेयाबीन की फसल में 80 से 90 फीसदी, मूंग में 70 और उड़द में भी 60 फीसदी तक नुकसान हुआ है। मक्का की फसल भी 40 से 50 फीसदी खराब हाे गई है। धान की फसल में 10-15 फीसदी नुकसान है। तिल, मूंगफली व मक्के की फसल भी खराब हुई है। कुल मिलाकर करीब 2519 कराेड़ की फसलें तबाह हाे गई हैं।

बारां के किशनगंज और मांगराेल के किसानाें का कहना है कि अभी तक खेताें में पानी भरा हुआ है। खेताें में साेयाबीन, उड़द की फसल पूरी तरह खराब हाे गई है। काेटा के इटावा, खाताैली और सुल्तानपुर के इलाकाें में खेताें व गांवों में फसलें अभी तक पानी में डूबी रहीं।

जिन खेतों से पानी निकल गया, उनमें फसल नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणाें का कहना है कि उन्हाेंने ताे फसल की आस ही छाेड़ दी है। बूूंदी के केपाटन, तालेड़ा, कापरेन की बेल्ट में साेयाबीन व उड़द की फसल पूरी तरह गल गई है। हालांकि, धान की फसल में मामूली नुकसान है।

किसान बोले-खेतों में अभी भी पानी भरा है, महंगे बीज खरीदकर फसल लगाई थी, पूरी तरह बर्बाद हो गई

हाड़ाैती में लगभग 10 लाख हैक्टेयर में फसलाें की बुआई हुई थी। इटावा, केपाटन, तालेड़ा, किशनगंज, अंता, मांगराेल व खानपुर बेल्ट में ज्यादा खराबा है। साेयाबीन, उड़द, मूंग, मक्का, मूंगफली, तिल्ली की फसलें 60 से 90% तक खराब हाे गई हैं।
– दशरथ कुमार, किसान नेता

इटावा, सुल्तानपुर, बूढ़ादीत, खाताैली, दीगाेद, कैथून, रंगपुर, चंद्रसेल में साेयाबीन पूरी तरह से नष्ट हाे गई है। खेताें में पानी के सिवाए कुछ नहीं है। बूंदी, बारां के कई इलाकाें में भारी नुकसान है। हर जगह 70 फीसदी से ज्यादा नुकसान है।

– जगदीश शर्मा, किसान नेता

मैंने 10-10 बीघा में साेयाबीन व उड़द की थी। खेत पानी से लबालब हैं। फसल पूरी तरह से खत्म हाे चुकी है। महंगे बीज लाकर फसल बाेई थी। हर किसान परेशान है और किसी के समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें।

– सत्यनारायण सिंह, किसान, किशनगंज, बारां

मैंने 30 बीघा में साेयाबीन और 10 बीघा में उड़द की फसल की थी। पानी से दाेनाें फसलें पूरी बर्बाद हाे गई हैं। अब कहां जाएं किससे शिकायत करें। 8000 रुपए क्विंटल का बीज लाकर बाेया था। करीब 8.5 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान होगा

– सूरजमल नागर, किसान, केपाटन

पीपल्दा विधानसभा में 60 से 70 फीसदी से ज्यादा फसल खराब

पीपल्दा विधानसभा में 60 से 70 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है। कई गांवाें में ताे पूरी फसल ही खत्म हाे गई है। कुछ गांव ताे अभी भी डूबे हैं। उसके बाद भी सरकार ने प्राथमिक स्तर पर कुछ नहीं किया है। सरकार केवल 30 से 40 फीसदी नुकसान बता रही है। सरकार साफ झूठ बाेल रही है। उनके अधिकारी तक अभी माैके पर नहीं पहुंच पाए हैं।

– विद्याशंकर नंदवाना, पूर्व विधायक

बारिश से सांगाेद इलाके में सभी फसलें 100 फीसदी खराब हाे गई हैं। यहां किसी भी गांव में काेई फसल बाकी नहीं रही है। ऐसे में यहां के किसानाें का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने अब पटवारियाें से सर्वे शुरू कराया है।

– हीरालाल नागर, पूर्व विधायक

केंद्रीय मंत्रालयों की टीम कोटा पहुंची, आज शुरू करेगी सर्वे

अतिवृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेने छह सदस्यीय अंतर मंत्रालयिक केंद्रीय दल बुधवार शाम कोटा पहुंच गया। कलेक्टर उज्ज्वल राठौड़ ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र के साथ इटावा व सांगोद समेत संपूर्ण जिले में 508 गांव अतिवृष्टि से प्रभावित हुए हैं।

केंद्रीय दल की पहली टीम में गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुमंत सिंह, वित्त मंत्रालय में सलाहकार आरबी कौल एवं जल संसाधन मंत्रालय में निदेशक एचएच सेंगर कोटा एवं बूंदी जिले में दौरा करेंगे। दूसरी टीम में कृषि विभाग में निदेशक आरपी सिंह, सड़क एवं परिवहन मंत्रालय में क्षेत्रीय अधिकारी आलोक दीपंकर सहित ग्रामीण विकास मंत्रालय में अवर सचिव एसबी तिवारी बारां एवं झालावाड़ में सर्वे करेंगे।

विरोधाभास- सरकारी आंकड़े बता रहे हैं 3.66 लाख हैक्टेयर में खराबा

कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपाेर्ट में देखे ताेे हाड़ाैती में 10.04 लाख हैक्टेयर में फसलाें की बुआई हुई है। इसमें से केवल 3.66 लाख हैक्टेयर की फसल खराब हुई है। यानि केवल 36 फीसदी का खराबा। हालांकि इससे पहले संभागीय आयुक्त ने 30 प्रतिशत खराबा बताया था। वहीं काेटा दाैरे पर आए कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने 90 फीसदी खराबा बताया था।

हाड़ौती में कई गांवों में 100 फीसदी तक खराबा : शर्मा

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. रामावतार शर्मा कहना है कि हाड़ाैती के कई गांवाें में 100 फीसदी तक नुकसान है। बारां में कम नुकसान है। झालावाड़ और रामगंजमंडी के कई इलाकाें में बिलकुल नुकसान नहीं है। इसलिए ओवरऑल 30 से 40 फीसदी तक ही नुकसान है। धान में केवल 15 फीसदी नुकसान है। साेयाबीन की फसल को जरूर अच्छा खासा नुकसान हुआ है।

फसल 34 प्रतिशत खराब हो या 100%, मुआवजे की रकम बराबर ही देगी सरकार

सरकारी तंत्र आपदा प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के प्रयास में जुटा है। अगले दो से तीन दिन में सर्वे पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। राहत की प्रक्रिया और इसके नियम को इसे लेकर भास्कर ने कलेक्टर उज्जवल राठौड़ से बात की।

उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के नॉर्म्स के तहत नुकसान का आकलन करके सहायता राशि दी जाएगी। इसमें एक सबसे पेचीदा बात यह सामने आई कि किसी किसान की 34% फसल खराब है और किसी की 100 %, लेकिन मुआवजा दोनों को बराबर मिलेगा।

मृतकों या घायलों के आश्रितों काे कैसे मिलती है मदद

  • माैत होने पर उसके आश्रितों को 4 लाख रुपए।
  • ऐसे घायल, जिनकी अपंगता 40 से 60% के बीच हो, उन्हें 59100 रुपए।
  • ऐसे घायल, जिनकी अपंगता 60 प्रतिशत से ज्यादा हो, उन्हें 2 लाख रुपए।
  • ऐसे घायल, जिन्हें एक हफ्ते से ज्यादा अस्पताल में रहना पड़ा हो, उन्हें 12700 रुपए।
  • ऐसे घायल, जिन्हें एक हफ्ते से कम अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा हो, उन्हें 4300 रुपए।
  • मकान नष्ट होने की स्थिति में कपड़ों के लिए 1800 रुपए प्रति परिवार व बर्तनों के लिए 2000 रुपए प्रति परिवार।

फसलों के लिए ये है प्रावधान

33% से ज्यादा खराबे पर मुआवजे का प्रावधान है, असिंचित क्षेत्रों में प्रति है. 6800 और सिंचित क्षेत्रों में 13500 तक मुआवजा मिलता है। बारहमासी फसलों में 18000 रुपए प्रति है. मुआवजा मिलता है। अधिकतम 2 हैक्टेयर का ही मुआवजा मिलता है।

मकानों के नुकसान पर

  • पूरा मकान डैमेज होने पर 95100 रुपए मिलते हैं। 15 प्रतिशत तक डैमेज हाेने पर पक्के मकान पर 5200 रुपए और कच्चे मकान पर 3200 रुपए प्रति मकान देय है।
  • झोंपड़ी नष्ट होने पर 4100 और कैटल शेड के नष्ट होने पर 2100 रुपए प्रति शेड देने के नियम हैं।

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