Another achievement in Ajmer’s name, Artist Abdul Rashid’s name entered in India Book of Records; Selected for big and panoramic painting | अजमेर के नाम एक और उपलब्धि, आर्टिस्ट अब्दुल रशीद का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज; बड़ी व विहंगम पेंटिंग के लिए किया चयन


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अजमेर24 मिनट पहले

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अजमेर के आर्टिस्ट अब्दुल रशीद का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है। यह उपलब्धि रशीद द्वारा बनाई गई कुंभलगढ़ की विहंगम और बड़ी वॉल पेंटिंग पर मिली है। रशीद के साथ ही अजमेर का नाम भी अब इस रिकॉर्ड में लिखा और पढ़ा जाएगा। इस वाल पेंटिंग को बनाने में रशीद को 15 दिन का समय लगा था। रशीद को इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड की ओर से इस संबंध में मिले पत्र में जानकारी दी गई है कि उनके द्वारा जवाहर नवोदय विद्यालय की दीवार पर बनाई वाल पेंटिंग के लिए इस उपलब्धि से नवाजा गया है। विद्यालय की दीवार पर रशीद ने 15 फीट ऊंची और 60 फीट चौड़ी यह आकर्षक और मनमोहक पेंटिंग बनाई है। इतनी लंबी और चौड़ी पेंटिंग बनाने का यह अनोखा कीर्तिमान रशीद ने स्थापित कर दिया है।

धरोहर संरक्षण का दिया संदेश
भिनाय निवासी और किशनगढ़ के रतनलाल कंवरलाल पाटनी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के आर्ट शिक्षक अब्दुल रशीद ने बताया उनका हमेशा यही उद्देश्य रहा है कि जिस जिले में भी रहे वहां की धरोहर संरक्षण के लिए उन्होंने कार्य किया। विद्यार्थियों को भी यही संदेश दिया कि अपनी धरोहरों की सुरक्षा करें और उनके महत्व को समझें। इनसे ही हमारी जड़ें जुड़ी हैं। रशीद ने कहा कि 28 जुलाई 2021 को ही उनकी यह कृति रिकॉर्ड के लिए चयनित हुई है। अब वर्ष 2021-22 की जी के की पुस्तकों में उनका यह रिकॉर्ड शामिल होगा।

एनामल कलर से खिल उठी तस्वीर
रशीद कहते हैं कि संस्थाओं के बजट भी सीमित होते हैं। ऐसे में एक कलाकार को अपनी पेंटिंग के सृजन के लिए भी इस बजट को भी ध्यान में रख कर ही कार्य करना होता है। कुंभलगढ़ की वॉल पेंटिंग के लिए उन्होंने सामान्य बिड़ला पुट्टी के बाद प्राइमर किया और इस पर एनामल कलर से यह पेंटिंग की। आज जिस हॉल में यह पेंटिंग बनी है, वहीं पर स्कूल एसेंबली होती है और बड़े आयोजन होते हैं। विद्यार्थियों के साथ ही बाहर से आने वाले आगंतुक भी धरोहर संरक्षण का संदेश लेकर जाते हैं।

टोंक की जामा मस्जिद का आकर्षक चित्र भी रहा चर्चा में
रशीद ने बताया कि कुछ समय वे टोंक में पद स्थापित रहे थे। वहां की मुख्य धरोहर जामा मस्जिद का चित्र भी उन्होंने बनाया था। यह चित्र भी काफी चर्चा में रहा। विद्यार्थियों को इसके महत्व के बारे में जानकारी मिलती। इसके साथ ही विद्यार्थियों में कला और विशेषकर चित्रकारी के प्रति रूचि भी जागृत होती है।
अजमेर के भिनाय निवासी अब्दुल रशीद वर्तमान में नाथद्वारा, राजसमंद स्थित सेठ मथुरादास बिनानी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सहायक आचार्य चित्रकला के पद पर कार्यरत हैं। रशीद की कलाकृति फिर से शांति (पीस अगैन) सातवें जिओ जे इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल साउथ कोरिया के लिए चयनित कर ली गई है।

इंटरनेशनल फेस्टिवल में भी प्रदर्शित होगी उनकी कृति
अब्दुल रशीद ने बताया कि सातवें जियो जे इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल 2021 का आयोजन साउथ कोरिया के युकुंग ऑफ आर्ट 1- 5 में हेजुमगेंग थीम संग्रहालय में किया जाएगा। इस प्रदर्शनी की थीम एक बार फिर शांति है। इस फेस्टिवल में भारत के अलावा, अमेरिका, जापान, नॉर्थ व साउथ कोरिया, चीन, ईरान सहित दुनियाभर के 50 देशों के कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन और विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के कलाकारों के साथ एक नया विचार तलाशने के लिए यह प्रदर्शनी एक मंच होगी। इस प्रदर्शनी में विश्व के लिए सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत के रूप में स्थाई संग्रह के लिए अब्दुल रशीद की कलाकृति का चयन किया गया है। यह ऑफलाइन प्रदर्शनी 1 सितंबर 2021 से 25 अक्टूबर 2021 तक हेजुमगैंग थीम संग्रहालय साउथ कोरिया में आयोजित की जाएगी।

(रिपोर्ट : आरिफ कुरैशी)

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