Uttar Pradesh (UP) BJP BSP SP Party Mps Criminals Records Updates | 80 सांसद में 44 पर केस, 35 BJP, BSP के 5 और SP के 2, विधायक 403 में 143 आपराधिक


लखनऊएक घंटा पहले

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माननीय का अपराधिक रिकार्ड पर अगर नजर डाली जाए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं - Dainik Bhaskar

माननीय का अपराधिक रिकार्ड पर अगर नजर डाली जाए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं

उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा और 403 विधानसभा के माननीय का अपराधिक रिकार्ड पर अगर नजर डाली जाए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। अपराधिक रिकॉर्ड में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के सांसद और विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में चुनकर आए 403 में 143 पर है तो जिसमें भाजपा के 114, सपा के 14, बसपा के 5 और कांग्रेस के 1 विधायक पर आपराधिक मामले शामिल हैं। वहीं यूपी के 80 लोकसभा सांसदों के आपराधिक रिकॉर्ड पर नजर डाले तो 44 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें भाजपा के 35, बसपा के 5 और सपा के 2 सांसद शामिल हैं।

सपा के आज़म खान पहले तो बसपा के घोसी से सांसद दूसरे पर सांसद 2019 चुनाव की एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 80 सांसद हैं। प्रदेश के 44 नए सांसदों पर आपराधिक केस दर्ज है। इनमें से 37 ऐसे हैं जिनपर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है। पिछले साल ये आपराधिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले सांसदों की संख्या 28 थी। आपराधिक मामलों में रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान पहले, दूसरे पर घोसी से बसपा सांसद अतुल सिंह और तीसरे नंबर पर भाजपा के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज हैं।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां के 2019 में चुनकर आए यहां के 80 लोकसभा सांसदों में से 44 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। जबकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में चुनकर आए 403 विधायकों में से 147 विधायकों पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं।

2017 में 143 विधायक जीतकर आए

2017 के विधानसभा चुनाव में जिन 859 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज थे, उनमें से 143 तो जीतकर विधानसभा भी पहुंच गए। मतलब 2017 के विधानसभा चुनाव में जो 403 विधायक चुनकर आए थे, उनमें से 143 यानी 36% पर आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि, 2012 की तुलना में ये आंकड़ा कम था। 2012 में 189 विधायक क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले थे।

इस चुनाव में भाजपा ने सबसे ज्यादा 312 सीटें जीती थीं। उसके ही सबसे ज्यादा 114 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके अलावा बसपा, सपा और कांग्रेस ने 72 सीटें जीती थीं। इन तीनों पार्टियों के 20 विधायक क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले थे।

खुद सीएमओ डिप्टी सीएम जगन ने अपराध के मुकदमे वापस लिए हैं अब पुनर्विचार करना चाहिए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता व एमएलसी सर्वोच्च न्यायालय ने जो दिशा निर्देश जारी किए हैं,जो राजनैतिक व्यक्तियों पर आपराधिक मुकदमे हैं वो स्वतःवापस नहीं हो सकते। लेकिन जो उत्तर प्रदेश में जो सर्वोच्च और संवैधानिक पदों पर बैठे हैं,वह खुद मुकदमे वापस ले लेते हैं खुद मुख्यमंत्री योगी ने अपने जघन्य अपराधों की धाराओं को वापस ले लिया। उपमुख्यमंत्री के भी मुकदमे वापस लिए।अपने अपराधी नेताओं का मुकदमा वापस ले लिया और खुद न्यालय हो गए।तो ऐसे में अगर सरकार न्यायालय हो जाएगी तो न्यायालय क्या करेगा? हम तो सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध करेंगे कि,इन सभी लोगों का मुकदमों पर पुनःविचार हो और जो पीड़ित पक्ष ने मुकदमा लिखवाया था उनको न्याय मिल सके।

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