In Kushinagar, the unorganized labor front freed the children doing bonded labor and sent them to their families, the company used to get the work done for 16 hours by giving some food. | कुशीनगर में असंगठित मजदूर मोर्चा ने बन्धुआ मजदूरी करते बच्चों को मुक्त करवाकर उनके परिजनों के पास भेजा, कंपनी वाले थोड़ा खाना देकर 16 घंटे करवाते थे काम


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एक घंटा पहले

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कुशीनगर में राजकोट से मुक्त करवाए बच्चों को उनके परिजनों के हवाले किया गया। - Dainik Bhaskar

कुशीनगर में राजकोट से मुक्त करवाए बच्चों को उनके परिजनों के हवाले किया गया।

कुशीनगर में असंगठित मजदूर मोर्चा ने यहां के रहने वाले चार नाबालिग गरीब घर के बच्चों को गुजरात की एक फैक्ट्री से मुक्त करवाया है। बच्चों को काम और पैसों का लालच देकर वहां ले जाया गया था। बाद में फैक्ट्री मालिक ने उन्हें फैक्ट्री में ही कैद कर लिया उनसे 16 घंटे काम लिया जाता था। थोड़ा सा खाना दिया जाता था और फैक्ट्री से बाहर जाने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी। मामले की जानकारी होने पर घर वालो ने मजदूर मोर्चा से मदद की गुहार लगाई थी।

धोखे से बच्चों को ले जाया गया गुजरात
मामला पडरौना क्षेत्र के ग्राम नरहर छपरा के टोला के बड़ा सेमरहना मुसहर बस्ती का है। यहां के रहने वाले अजय(16) , पवन(14), संजय(15), दुर्गेश(16) को उनके गांव के ही रहने वाले गुलाब ने जनवरी 2021 में उन चारों को गुजरात पहुंचाया। उसने बताया था कि उनसे 8 घंटे काम करवाकर उन्हें 7500 रुपए वेतन दिया जाएगा। वहां जाने के बाद एक कपड़े की फैक्ट्री में उन बच्चों को दे दिया गया।

कपड़ा फैक्ट्री में करवाई जाती थी बन्धुआ मजदूरी
कंपनी मालिक ने वहां इनसे बन्धुआ मजदूरी करवाना शुरू कर दिया। उन्हें सुबह 7 बजे उठाकर रात के 11 बजे तक इनसे काम करवाया जाता था। फैक्ट्री से बाहर ना जाने की सख्त हिदायत दी गई थी। नहीं तो जान से मारने की भी धमकी दी जाती थी। साथ ही उनके साथ रोज गाली-गलौच होता था और खाने में थोड़ा सा खाना दिया जाता था।

बच्चों ने परिजनों को दी सूचना
किसी तरह बच्चों ने परिजनों को इसकी सूचना दी। तो इनके घरवालों ने किसी के माध्यम से असंगठित मजदूर मोर्चा के कार्यकर्ता दुर्गा से सम्पर्क किया। जिसके बाद संगठन ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन बच्चों का रेस्क्यू करवाया। बच्चों को लाकर घरवालों के सुपुर्द किया।

फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग
असंगठित मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दलसिंह ने बताया की काम करा कर मजदूरी ना देना, मजदूरों का मानसिक उत्पीड़न करना, लगातार 16 घंटे काम कराना आदि बधुआ मजदूरी कराया जाना माना जाता है। इसलिए जिला प्रशासन राजकोट इस पर तुरंत बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम 1976, इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स मैन एक्ट 1989, अनुसूचित जाति अत्याचार निषेध अधिनियम 1989, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के साथ मानव तस्करी के तहत कार्रवाई करते हुए मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करें ऐसी हमने पत्र लिखकर अपील की है।

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