Hearing on anticipatory bail of Devendra, Ajit, absconding in kidnapping, ransom case today, adjourned the decision on Dr. Renu Soni till next Monday; Question – Was the police deliberately giving a chance? | अपहरण, फिरौती मामले में फरार देवेंद्र, अजीत की अग्रिम जमानत पर सुनवाई आज, डॉ. रेणु सोनी पर फैसला अगले सोमवार तक टला; सवाल – पुलिस जानबूझकर मौका दें रही?


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खंडवाएक घंटा पहले

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प्रतीकात्मक चित्र। - Dainik Bhaskar

प्रतीकात्मक चित्र।

खंडवा में नाबालिग का प्रसव करवाकर नवजात की खरीद-फरोख्त में संलिप्त कथित डॉक्टर के अपहरण और मारपीट कर फिरौती मांगने वाले चारों पत्रकार पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए है। गंभीर अपराध में केस दर्ज हुए 17 से 20 दिन बीत गए। न अस्पताल संचालक डॉ. रेणु सोनी गिरफ्तार हो पाई। अब इनामी डॉ. सौरभ सोनी समेत दो यूट्यूब पत्रकार अजीत और देवेंद्र अग्रिम जमानत कराने हाईकोर्ट तक पहुंच गए। सवाल यह उठता है कि, क्या पुलिस जानबूझकर फरार आरोपियों को मौका दे रही है।

24 जुलाई शनिवार को शहर के कथित डॉक्टर सौरभ सोनी, सोनी अस्पताल की संचालक डॉ. रेणु साेनी, स्टॉफ के मोहसिन व कमलेश समेत नर्स संजूला पटेल, सहयोगी वर्षा यादव के विरुद्व कोतवाली पुलिस ने पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया। कुछ दिन बाद इन आरोपियों पर मानव तस्करी की धारा भी लगी। प्रकरण में सौरभ, कमलेश, संजूला व वर्षा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। वहीं डॉ. रेणु सोनी व मोहसिन अब भी फरार है, इन पर 10-10 हजार का ईनाम घोषित हो चुका हैं।

इसी मामले के मुख्य आरोपी सौरभ सोनी ने पत्रकार अजीत लाड़, राज उर्फ मल्ली पिल्ले, देवेंद्र जायसवाल व सदाकत पठान की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की। बताया कि इन पत्रकारों ने अपहरण कर मेरे साथ मारपीट की और 50 लाख की फिरौती मांगी। 20 लाख रुपए देने पर इनके द्वारा छोड़ा गया। 26 जुलाई सोमवार को कोतवाली पुलिस ने चारों के विरुद्व अपहरण, मारपीट और फिरौती मांगे जाने की धाराओं में केस दर्ज किया। सभी आरोपी फरार है, पुलिस 10-10 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर चुकी है।

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– जांच दल का नाम ‘एसआईटी’ लेकिन काम फिसड्डी

दोनों मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की गहनता से जांच के लिए पुलिस अधीक्षक विवेकसिंह ने दो एसआईटी दलों का गठन किया। लेकिन इनका काम फिसड्डी साबित हुआ। क्योंकि, जिन्हें एसआईटी की कमान सौंपी गई उनकी कार्यशैली और रवैया काफी ठंडे तेवर का है। पुलिस रिकार्ड में ऐसा पहला मामला रहा कि, 17 से 20 दिन में एक भी आरोपी पकड़ा नहीं गया। पुलिस का सूचना तंत्र फेल है या फिर पुलिस की मंशा नहीं है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए। ताकि, हाईकोर्ट तक जाने का मौका मिल जाए।

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