For 21 years, soldiers go to the borders and tie rakhis, first went to Sri Ganganagar in 1999, this year the cost of each person will be 10 thousand | बैतूल की बहनें 21 सालों से सीमाओं पर जाकर सैनिकों को बांधती हैं राखियां, सबसे पहले 1999 में गए थे श्री गंगानगर, इस साल 10 हज़ार होगा प्रत्येक व्यक्ति का खर्च


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बैतूलएक घंटा पहले

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बीएसएफ के जवानों को राखी बांधते हुए राष्ट्र रक्षा मिशन की बहनें - Dainik Bhaskar

बीएसएफ के जवानों को राखी बांधते हुए राष्ट्र रक्षा मिशन की बहनें

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई और बहन के प्यार प्रतीक माना जाता है। जिसे बैतूल की बेटियां हर वर्ष आंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर जाकर देश की सुरक्षा में खड़े सैकड़ो जवानों की कलाइयों पर राखियां बांध कर मानती हैं। इस वर्ष बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति का राष्ट्र रक्षा मिशन अपने संकल्प का 22वां वर्षगांठ लेह-लद्दाख की सीमाओं पर तैनात जवानों के साथ पूरा करेगा। मिशन प्रत्यक्ष रूप में करीब 700 सैनिकों को राखियां बांधता हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर जाकर राखी बांधने का यह सिलसिला समिति ने पिछले 21 सालों से बरकरार रखी है।

17 अगस्त को लेह के लिए होंगे रवाना
इस बार कोरोना काल की वजह से करीब 15 सदस्यों का दल लेह-लद्दाख जाएगा। 17 अगस्त को दल पातालाकोट एक्सप्रेस से भोपाल और फिर भोपाल में मालवा एक्सप्रेस से जम्मू के लिए रवाना होगा। यहां से लेह के लिए आगे की यात्रा की जाएगी। समिति अध्यक्ष गौरी पदम ने बताया कि राष्ट्र रक्षा मिशन सतत जारी है और उनका कहना है कि यह संकल्प वो अंतिम सांस तक निभाएंगी।

एयरफोर्स संग रक्षाबंधन

एयरफोर्स संग रक्षाबंधन

सगे भाइयों को भी बांधती है रखियाँ
सीमाओं पर जाकर राखी बांधने वाली लड़कियां आमतौर पर अपने सगे भाइयों को बार्डर पर रवाना होने से पहले राखी बांध देती हैं या फिर बॉर्डर से लौटकर राखियां बांधती हैं।

इस साल सीमाओं पर भेजी है 21 हजार राखियां
सीमाओं पर जाकर राखी बांधने के आलावा मिशन, सामाजिक संगठनों एवं छात्राओं द्वारा भेंट की गई हजारों राखियां भी सीमाओं पर भेजता है। इस वर्ष 21 हज़ार रखियों को सरहदों के लिए पोस्ट भी कर दिया गया है। जिसमें से करीब 10 सरहदों पर यह राखियां पहुंच भी चुकी है।

बॉर्डर सिक्योरिटी

बॉर्डर सिक्योरिटी

कोरोना काल में नहीं मिली अनुमति
पिछले साल कोरोना के लहर और खतरे को भांपते हुए, उन्हें बॉर्डर पर जाने की अनुमति नहीं मिल पायी थी। इस वजह से मिशन ने 20 हज़ार राखियों को सीमाओं तक पोस्ट से भेज दिए थे।

करीब 10 हज़ार प्रति व्यक्ति का होगा खर्च
सीमाओं पर जाकर राखी बांधने में प्रत्येक व्यक्ति का 5 से साढ़े पांच हजार रुपए तक का खर्च आता है। लेकिन इस साल का खर्च करीब 10 हज़ार प्रति व्यक्ति आने का अनुमान हैं। यात्रा का खर्च व्यक्ति खुद ही उठाता है। लेकिन दूसरे ख़र्चों के लिए समाजसेवी मदद के लिए हमेशा साथ खड़े रहते हैं।

इस साल खर्च करीब 10 हज़ार प्रति व्यक्ति आने का अनुमान

इस साल खर्च करीब 10 हज़ार प्रति व्यक्ति आने का अनुमान

सबसे पहले गए थे श्री गंगा नगर
मिशन की शुरुआत सबसे पहले 26 अगस्त 1999 को हुई थी। जब भारत ने पाकिस्तान को कारगिल के युद्ध में नाको चने चबवा दिए थे। फौजियों के इस पराक्रम को सराहने और उनके हौसलों की आफजाई के लिए राष्ट्र रक्षा मिशन 26 अगस्त 1999 को श्री गंगा नगर, राजस्थान (भारत-पाक सीमा ) राखी बांधने गया था। उस दिन से आज तक मिशन ने इस सिलसिले को बरक़रार रखा है।

अनुमति के लिए करते हैं आवेदन
रेड ज़ोन के कन्टेनमेंट एरिया में जाकर राखियां बांधना इतना आसान होता है नहीं। इस बारे में मिशन अध्यक्ष ने बताया की सेना हेडक्वार्टर, दिल्ली, आईजी-डीआईजी अफसरों और सेना के लेवल पर अनुमति के लिए आवेदन करते हैं । आवेदन से अनुमति मिलने तक की पूरी प्रक्रिया में करीब एक से दो महीने लग जाते हैं। अनुमति के विषय में ज्यादा बताने के बारे में वो थोड़ा झिझक रहीं थी।

मजबूत है बेटियों के हौसले
देश जब तनाव से जूझ रहा था। उस समय में भी बैतूल की बेटियों का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने उस वक़्त भी अपने मिशन को नहीं छोड़ा और सरहदों पर जाकर सैनिको की सूनी कलाइयों पर राखी बांधा। यह पहला मौका है जब समिति का राष्ट्र रक्षा मिशन 18 हजार फीट ऊंचाई पर तैनात सैनिकों के साथ रक्षा बंधन मनाएंगा। समिति अध्यक्ष गौरी पदम व सचिव भारत पदम के नेतृत्व में हिमानी हेड़ाऊ, दीक्षा तरुड़कर, माधुरी पुजारे, अनिता तरुड़कर, हर्षलता खाकरे, रुही झरबड़े, कमल डांगे, पुष्पा डांगे, सुमित नागले, रजत यादव, प्रदीप निर्मले, वंश पदम लेह लद्दाख पहुंचेंगे और 27 अगस्त को दक्षिण एक्सप्रेस से राष्ट्र रक्षा मिशन का दल बैतूल वापसी करेगा।

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