After 6 years, 66% less rain than average, crops destroyed in 4 lakh hectares, if there is no rain for 10 days, then there is a loss of 5 billion | 6 साल बाद औसत से 66%कम बारिश, 4 लाख हेक्टेयर में फसलें चौपट, 10 दिन बारिश नहीं हुई तो 5 अरब का नुकसान


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बाड़मेरएक घंटा पहलेलेखक: पूनमसिंह राठौड़

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बर्बादी की तस्वीर;जिले में औसत 247 के मुकाबले अब तक 85 एमएम बारिश - Dainik Bhaskar

बर्बादी की तस्वीर;जिले में औसत 247 के मुकाबले अब तक 85 एमएम बारिश

  • भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट – 58 दिन बाद बारिश नहीं, गडरारोड,सिवाना व सिणधरी को छोड़ 12 तहसीलों में 100 एमएम से भी कम बारिश

जिले में मानसून रूठ जाने से 58 दिन बाद बारिश का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। अब तक औसत से 66 फीसदी कम बारिश हुई है। आधा सावन सूखा बीतने से 30 फीसदी बाजरे की फसलें जलकर नष्ट हो गई। दस दिन के बाद भी बारिश नहीं हुई तो 80 फीसदी फसलें चौपट हो जाएगी। पहले मानसून ने देरी से दस्तक दी और फिर बीच में ही दगा दे गया।

इस वजह से 15 लाख के मुकाबले 9 लाख हेक्टेयर में ही खरीफ फसलों की बुआई हुई थी। करीब 4 लाख हेक्टेयर में फसलें चौपट होने के कगार पर है। अब बारिश नहीं होने से जिले के चार लाख किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जिले में औसत बारिश 247 एमएम होनी थी, लेकिन अब तक सिर्फ 85 एमएम पानी बरसा है।

जिले की 15 तहसीलों में बारिश के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो गडरारोड,सिणधरी व सिवाना को छोड़ एक भी तहसील क्षेत्र में 100 एमएम भी बारिश नहीं हुई है। ऐसे में 500 अरब की खरीफ फसलों पर संकट से छह साल बाद भीषण अकाल दस्तक दे चुका है। आगामी 10 दिन तक बारिश नहीं हुई तो जिले के 90 फीसदी हिस्से में सूखा पड़ना तय है।

सबसे ज्यादा 50 फीसदी बाजरे की फसलें चौपट
खरीफ सीजन 2021 में जिले में सर्वाधिक 4.50 लाख हेक्टेयर में बाजरे की फसल की बुआई की गई। हालांकि लक्ष्य से 50 फीसदी बुआई कम हुई। पहली अच्छी बारिश में किसानों ने बाजरे को प्राथमिकता दी। वहीं ग्वार की करीब दो लाख हेक्टेयर में बुआई की गई। 58 दिन के इंतजार के बाद भी मानसून मेहरबान नहीं होने से 50 फीसदी बाजरा की फसलें चौपट हो गई है। अगले दस दिन में बारिश नहीं हुई तो ग्वार, मूंग,मोठ व तिल की फसलें भी बर्बाद हो जाएगी।

6 साल में पहली बार सिर्फ 85 एमएम बारिश
जिले में इस बार मानसून की बेरुखी के कारण अच्छी बारिश नहीं हुई। अब तक सिर्फ 85 एमएम बारिश हुई है जो औसत से 66 फीसदी कम है। पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखे तो वर्ष 2016 में 250 एमएम, 2017 में 300, 2018 में 97, 2019 में 186 व 2020 में सर्वाधिक 303 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी।

8 साल बाद सबसे भीषण सूखे की चपेट में बाड़मेर
बाड़मेर व अकाल का चोली-दामन का साथ रहा है। हर दूसरे साल सूखा पड़ता है। सीजन में औसत से 50 फीसदी कम बारिश होने से हर साल फसल खराबे का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में जिले के 1600, 2015 में 1470 गांव प्रभावित थे। 2016 में 2478 और 2017 में 1900,2018 में 2694 व 2020 में 350 गांव अकालग्रस्त घोषित हुए थे। इस बार आधा सावन सूखा बीत चुका है। इस स्थिति में 8 साल बद सबसे भीषण सूखे की आशंका है।

गडरारोड में सर्वाधिक 163 व सबसे कम चौहटन में 39 एमएम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 85.23 एमएम बारिश दर्ज की गई। गडरारोड तहसील में सर्वाधिक 163 एमएम बारिश हुई है। वहीं सबसे कम चौहटन में सिर्फ 39 एमएम पानी बरसा। सिणधरी में 137 व सिवाना में 146 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। तीन तहसीलों को छोड़ शेष सभी जगह बारिश ने सौ का आंकड़ा भी पार नहीं किया। यानी औसत से 80 फीसदी कम बारिश हुई है।

एक्सपर्ट व्यू: बाजरा का उत्पादन 50% घटेगा बारिश के अभाव में 40 फीसदी फसलें हुई बर्बाद

इस बार सीजन में अब तक 33 फीसदी बारिश हुई है। औसत से 66 प्रतिशत कम बारिश के कारण खरीफ फसलें बर्बाद हो रही है। बाजरा की फसल की पैदावार 50 फीसदी घट जाएगी क्योंकि समय पर बारिश नहीं होने से फसल की ग्रोथ नहीं हुई। दो से ढाई फीट पर ही फसलें मुरझाने से सिरटों में दाने ही नहीं पड़े। 58 दिन बारिश नहीं होने से बाजरा की 30 से 40 फीसदी फसलें खराब हो चुकी है। पांच से दिन तक बारिश नहीं हुई तो उत्पादन 50 प्रतिशत कम हो जाएगा। बारिश के अभाव में मूंगफली की फसल में दीमक लगने के साथ रोग फैलने की आशंका है।
-डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक।

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