Traders are sitting on the sidewalk in Clock tower, the corporation could not develop 9 vending zones even in 6 years | घंटाघर में फुटपाथ पर फैलकर बैठे हैं व्यापारी, 6 साल में भी 9 वेंडिंग जोन विकसित नहीं कर पाया निगम


जोधपुर16 मिनट पहले

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घंटाघर की कई गलियां व्यापारियों के बाहर रखे सामान के कारण सिकुड़कर चंद फीट की रह गई हैं। - Dainik Bhaskar

घंटाघर की कई गलियां व्यापारियों के बाहर रखे सामान के कारण सिकुड़कर चंद फीट की रह गई हैं।

  • हाईकाेर्ट के घंटाघर को लेकर महत्वपूर्ण फैसले के बाद भास्कर ने मौके के हालात से लेकर
  • व्यापारियों और निगम के पक्ष तक जाने…

छह साल बाद घंटाघर के अतिक्रमण काे लेकर एक बार फिर कवायद शुरू हाेने की उम्मीद बंधी है। हाईकाेर्ट की खंडपीठ ने घंटाघर के अतिक्रमण काे लेकर दायर याचिकाओं काे निस्तारित करने दाेषी अफसराें के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश के बाद उत्तर नगर निगम ने घंटाघर के अतिक्रमण के लेकर फूलप्रूफ प्लान बनाने की कवायद में जुट गया है।

निगम ने घंटाघर से ठेलाधारकाें काे ताे हटा दिया, लेकिन अब दुकानदाराें के फुटपाथ पर कब्जा करने से पर्यटकाें काे हाट बाजार और हेरिटेज लुक नजर नहीं आता है। हालांकि निगम ने घंटाघर की निगरानी के लिए अतिक्रमण विंग व कर्मचारियाें की टीमें भी तैनात की, लेकिन दुकानदार अपनी दुकान के बाहर सामान सजाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

दैनिक भास्कर ने हाईकाेर्ट की खंडपीठ के आदेश के बाद मंगलवार काे हालात पर नजर डाली ताे अधिकांश दुकानदार फुटपाथ पर सामान सजाकर बैठे नजर आए। इस मामले में अधिकारियाें से बात की ताे उन्हाेंने कहा कि हमें आए कुछ दिन हुए हैं। हम पूरे मामले काे देख रहे हैं, जल्द ही घंटाघर काे पुराने हाट बाजार के स्वरूप में लाैटाने वाला एक फूलप्रूफ प्लान बनाएंगे, ताकि भविष्य में काेई भी दुकानदार अपनी दुकान के आगे या फुटपाथ पर सामान नहीं सजाए। ऐसा करने पर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, ताकि घंटाघर का स्वरूप ना बिगड़े।

नगर निगम की ये सुस्ती – वेंडिंग जाेन सिर्फ साइन बाेर्ड तक सिमटे, कोई व्यवस्था नहीं की

हाईकाेर्ट ने 6 साल पहले यह कहते हुए ही याचिका निस्तारित की थी कि नगर निगम शहर में वेंडिंग जाेन विकसित करेगा। वहां प्रत्येक वेंडर काे 6 गुणा 8 फीट की जगह और बिजली-पानी व स्थायी शेड उपलब्ध करवाएगा। खंडपीठ ने यह भी कहा कि वेंडिंग जाेन ऐसी जगह बनाना है, जाे व्यवसाय के लिए उचित हाे। हालांकि निगम ने स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी बनाने पर हाईकाेर्ट ने याचिका ताे निस्तारित कर दी, लेकिन 9 जगह वेंडिंग जाेन छह साल बाद भी विकसित नहीं हाे पाए।

निगम ने पुराना स्टेडियम, एम्स राेड, रातानाडा सब्जी मंडी, जेडीए सर्किल, आईटीआई के समीप काजरी राेड सहित 9 वेंडिंग जाेन के प्लान काे सरकार की मंजूरी के बावजूद विकसित नहीं किया जा सका। निगम की कार्रवाई सिर्फ वेंडिंग जाेन के बाेर्ड लगाने तक ही सिमटी हुई है। कुछ जगहाें पर ताे वेंडिंग जाेन के बाेर्ड भी उखड़ चुके हैं।

व्यापारियों का सवाल – बरामदे कहां हैं? निगम खुद ही बता दे
घंटाघर व्यापारी यूनियन का कहना है कि यहां 104 दुकानें हैं। बरामदों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। हकीकत में यहां बरामदे कहां हैं, वे खुद ही इसकी परिभाषा बताएं। हम सामान बाहर नहीं रखेंगे। पिछले 10 सालों में निगम ने अतिक्रमण के नाम पर 20-22 बार अभियान चलाए, लेकिन अभी तक यह तय नहीं कर पाया कि व्यापारी कहां तक व्यापार करें।

ठेलाधारकों का प्रश्न – वेंडिंग जोन कहां बनाए? कहां शेड लगाए?
हाथ-ठेला व फुटपाथ व्यापारी यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि घंटाघर से हमें तो बाहर निकाल दिया, लेकिन 6 साल बाद भी यह नहीं बताया कि व्यापार कहां करना है। बार-बार हम पर दबाव डाला जा रहा है कि हम वेंडिंग जोन में जाकर व्यापार करें, लेकिन निगम प्रशासन यह बताए कि वेंडिंग जोन में शेड लगाए क्या? जब शेड भी नहीं लगाए तो बिजली-पानी की सुविधा की बात करना ही गलत होगा।

आपसी अविश्वास का नतीजा – ठेलाधारकाें ने प्रपत्र ही नहीं भरे
राजस्थान हाईकाेर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने घंटाघर क्षेत्र से हटाए गए हाथ ठेला और फुटकर व्यापारियाें काे वैकल्पिक वेडिंग जाेन पर बिठाने की बात की। इसकाे लेकर तत्कालीन आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने शहर में अलग-अलग स्थानाें पर अधिकृत निर्धारित वेडिंग जाेन में व्यापार करने के लिए हाथ ठेला चालक फुटपाथ व्यापारियाें से निर्धारित प्रपत्र में तीन विकल्प भरकर निर्धारित वेंडिंग जाेन में व्यापार शुरू करने का दबाव डाला, लेकिन अधिकांश हाथ ठेला चालकाें ने प्रपत्र ही नहीं भरे थे।

इसके कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। इस मामले में नासवी के नेता ओमप्रकाश देवड़ा ने बताया कि पहले हाथ ठेला धारकों को व्यापार करने लायक वेंडिंग जोन चिह्नित करे, इसके बाद सभी सुविधाएं दे तो इस पर विचार करेंगे। घंटाघर में हाथ ठेलाधारकों को तो हटा दिया, लेकिन दुकानदारों का कब्जा हटाने के लिए निगम का कोई प्लान नहीं है।

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