Protests against keeping mobiles off, complaints of power shutdown are not improving, bill payment counters closed | कार्य से संबंधी नहीं कॉल नहीं किए अटेंड, 100 से शिकायतों का नहीं हुआ भुगतान, करीब 60 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान


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होशंगाबाद12 घंटे पहले

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बिजली कर्मियों दफ्तर में अधिकारी-कर्मचारियों ने 
ऑफिस के दरवाजे में ताला जड़, विरोध जताया। - Dainik Bhaskar

बिजली कर्मियों दफ्तर में अधिकारी-कर्मचारियों ने ऑफिस के दरवाजे में ताला जड़, विरोध जताया।

केंद्र सरकार के द्वारा लाए जा रहे इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के विरोध में मंगलवार को होशंगाबाद सहित प्रदेश भर के लगभग बिजली कर्मी, इंजीनियर हड़ताल पर है। हड़ताल में पहली बार बिजली कंपनी के अधिकारी-कर्मचारियों ने कार्यालय से संबंधी कॉल मोबाइल पर रिसिव नहीं किए । हड़ताल की वजह से होशंगाबाद शहर की 100 से ज्यादा शिकायताओं का निराकरण नहीं किया। जिनमें घरेलू व कमर्शियल उपभोक्ताओं को परेशानी उठाना पड़ा।

यूनाइटेड फोरम के जिला संयोजक विनोद पांडे ने बताया कि नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इन प्राइस एंड इंजीनियर के आव्हान पर यूनाइटेड फोरम के तत्वावधान में निजीकरण इलेक्ट्रसिटी अमेंडमेंट बिल सहित लंबित अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदाेलन हो रहा। दूसरे चरण में मंगलवार को एक दिवसीय हड़ताल रही। कार्यालय में ताले डले रहे व किसी भी प्रकार की समस्या न समाधान हुआ और न काम हुए। आवश्यक सेवा अस्पताल एवं न्यायालय में बिजली समस्याओं का सुधार हुआ। तीसरे चरण में 24 से 26 अगस्त तक 3 दिन की हड़ताल होगी।

बिजली अधिकारी-कर्मचारियों ने नारेबाजी कर हड़ताल की।

बिजली अधिकारी-कर्मचारियों ने नारेबाजी कर हड़ताल की।

बिजली कर्मियों की ये है मांग-

  • -केंद्र सरकार वितरण कंपनियों के निजीकरण के लिए प्रस्तावित विद्युत सुधार अधिनियम-21 लागू न करे।
  • -सभी वर्गों के संविदा विद्युत कर्मियों को आंध्र और बिहार की तरह नियमिय किया जाए।
  • -ठेका कर्मियों की सेवा सुरक्षित रखते हुए तेलंगाना/दिल्ली व हिमाचल प्रदेश की तरह भर्ती की जाए।
  • -विद्युत कंपनी के सभी अधिकारी कर्मचारीयो को फ्रंट लाइन कर्मचारियों की श्रेणी में रखकर मुख्यमंत्री कोविड-19 का लाभ दिया जाए।
  • -रिटायर होने के बाद लंबित ग्रेच्युटी, जीपीएफ, अवकाश नकदीकरण,पेंशन आदि वर्षों से लंबित देय भुगतान तत्काल किया जाए।
  • – विद्युत कंपनियों में वरिष्ठता और उच्चवेतनमान के आधार पर सभी वर्गों में रिक्त उच्च पदों के चालू प्रभार प्रदान किए जाएं और रिक्त पदों को भरा जाए।
  • -मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार सभी प्रकार के मृत्यु प्रकरणों में विद्युत अधिकारी-कर्मचारयों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
  • -राष्ट्रीय पेंशन योजना में शासकीय अंशदान वेतन और मंहगाई भत्ते का 14 प्रतिशत किया जाए।
  • – नियामक आयोग के निर्देशानुसार 750 करोड़ रुपये की राशि पेंशन ट्रस्ट में जमा कर उत्तर प्रदेश शासन की तरह राज्य शासन पेंशन गारंटी लेकर पेंशन का भुगतान ट्रेजरी से कराए।
  • – सातवें वेतनमान की विसंगतियों का निराकरण किया। इसमें वर्ष 2006 के पूर्व एवं बाद में नियुक्त अभियंताओं में वर्गीकरण किया गया है।
  • – ट्रांसमिशन कंपनी में नियुक्त आईटीआई की योग्यता रखने वाले परीक्षण सहायक को तृतीय श्रेणी में रखकर 2500 रुपये का ग्रेड-पे निर्धारित किया जाए।
  • – वर्ष 2018 के बाद नियुक्त अधिकारी कर्मचारियो के लिए पुरानी वेतन व्यवस्था लागू की जाए।
  • – अनुभाग अधिकारी के ग्रेड पे को राज्य शासन के वित्त विभाग के आदेशा अनुसार 4400/ में संशोधित ग्रेड पे 4200/-से 4800/-के समान वृद्धि की जाए।
  • – ई. वेतनमान से संबंधित सभी वर्गों की विसंगतितियो का निराकरण किया जाए।
  • – विद्युत मंडल की सभी उत्तरवर्ती कंपनियों में मानव संसाधन से संबंधित नियमो में एक रूपता प्रदान की जाए।
  • – कंपनी कैडर में कार्यरत सभी नियमित और संविदा कर्मचारियों को गृह जिले में पदस्थ करने की नीति लागू की जाए।
  • – कंपनी कैडर के सभी नियमित और संविदा कर्मचारी-अधिकारियों को 50 प्रतिशत और सेवानिवृत को बिजली बिल में 25 प्रतिशत छूट दी जाए।
  • – केंद्र के द्वारा घोषित महंगाई भत्ते और 2 वर्षों से रोकी गई वेतन वृद्धि लागू कर बकाया राशि का भुगतान किया जाए।
  • – सभी कंपनियों में संगठनात्मक संरचना पुनर्गठित कर ख़ली पदों को तत्काल भरा जाए।

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